सुप्रीम कोर्ट, (सोर्स- सोशल मीडिया) 
देश

सुप्रीम कोर्ट ने पलटा 2013 के चर्चित डॉक्टर सुब्बैया हत्याकांड का फैसला, 9 दोषियों को सुनाई उम्रकैद

Supreme Court ने 2013 के डॉक्टर सुब्बैया हत्याकांड में मद्रास हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए 9 दोषियों को उम्रकैद सुनाई है। संपत्ति विवाद में हुई इस हत्या में 13 साल बाद इंसाफ मिला है।

प्रतीक पाण्डेय

Dr Subbiah Tamil Nadu Murder: तमिलनाडु के एक मशहूर डॉक्टर की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला इसी सच्चाई को दोहरा रहा है। साल 2013 में हुई उस जघन्य वारदात ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जहां एक जीवन रक्षक को संपत्ति के लालच में मौत के घाट उतार दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने अब मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें सबूतों की कमी बताकर सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया था। अदालत का यह आदेश उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो समझते हैं कि वे कानूनी पेचीदगियों के पीछे छिपकर बच सकते हैं।

चेन्नई के मशहूर डॉक्टर की सरेराह हुई थी हत्या

14 सितंबर 2013 को चेन्नई के प्रतिष्ठित बिलरोथ अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टर सुब्बैया अपनी ड्यूटी खत्म कर घर लौट रहे थे। उस दिन उनकी हत्या कर दी गई। डॉक्टर की हत्या किसी राह चलते अपराधी ने नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई थी। इस साजिश के पीछे पी. पोन्नुसामी और मैरी पुष्पम नाम का एक बुजुर्ग दंपति था, जिनकी नजर डॉक्टर की कीमती संपत्ति पर थी। वे चाहते थे कि वह संपत्ति उनके बच्चों के काम आए और इसी लालच ने उन्हें अपराध के दलदल में धकेल दिया।

निचली अदालत की फांसी से हाईकोर्ट की रिहाई तक

इस मामले की कानूनी लड़ाई किसी फिल्म की पटकथा जैसी रही है। साजिश इतनी गहरी थी कि पोन्नुसामी ने इस काम को अंजाम देने के लिए 6.5 लाख रुपये की सुपारी दी थी। उनके दो बेटे, बेसिल और बोरिस भी इस साजिश का अहम हिस्सा थे। ट्रायल कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी नौ आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि, साल 2024 में मद्रास हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया और सबूतों के अभाव में सबको रिहा कर दिया। इस रिहाई से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को गहरा धक्का लगा था। लेकिन तमिलनाडु सरकार ने हार नहीं मानी और वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी। अंततः सर्वोच्च अदालत ने माना कि हाईकोर्ट से साक्ष्यों को परखने में चूक हुई थी।

बुजुर्ग दंपति को मिली मानवीय राहत

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एससी शर्मा की पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए मानवीय पहलुओं और कानून के कठोर सिद्धांतों के बीच एक महीन संतुलन बनाने की कोशिश की है। अदालत ने नौ में से सात दोषियों को दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का कड़ा निर्देश दिया है।

वहीं, मुख्य साजिशकर्ता रहे बुजुर्ग दंपति पी. पोन्नुसामी और मैरी पुष्पम के मामले में कोर्ट ने उम्र को देखते हुए कुछ नरमी दिखाई है। अदालत ने उनकी सजा को तब तक के लिए निलंबित कर दिया है जब तक कि राज्य सरकार उनकी दया याचिका पर फैसला नहीं ले लेती। हालांकि, पीठ ने यह साफ कर दिया कि यह रियायत केवल उनके बढ़ते उम्र और मानवीय कारकों की वजह से है, इसका मतलब उनके अपराध को कम आंकना कतई नहीं है।

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