सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस 
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राम सेतु बनेगा राष्ट्रीय स्मारक? स्वामी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

Supreme Court सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की रामसेतु को लेकर एक याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।

सौरभ शर्मा

Subramanian Swamy on Ram Setu: राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस याचिका में स्वामी ने अदालत से अनुरोध किया है कि वह सरकार को इस मामले पर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दे। यह मामला करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा है और इसके कानूनी तथा सांस्कृतिक पहलू काफी अहम हैं, जिस पर अब सबकी निगाहें टिक गई हैं।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए केंद्र को नोटिस जारी किया। स्वास्थ्य कारणों से डॉ. स्वामी अदालत में उपस्थित नहीं हो सके, उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विभा मखीजा ने पक्ष रखा। अदालत ने केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। इस नोटिस के बाद यह उम्मीद जगी है कि दशकों पुराने इस मुद्दे पर अब कोई ठोस फैसला सामने आ सकता है।

क्यों अहम है राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा?

डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी याचिका में कहा है कि राम सेतु करोड़ों लोगों के लिए आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है, जो इसे एक पवित्र तीर्थ स्थल मानते हैं। उन्होंने तर्क दिया है कि केंद्र सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह इस पुरातात्विक स्थल को किसी भी तरह के दुरुपयोग, प्रदूषण या अपवित्रता से बचाए। राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलने से राम सेतु को कानूनी संरक्षण मिलेगा और इसके रखरखाव और सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सकेगा। यह दर्जा इसे राष्ट्रीय धरोहर के रूप में स्थापित करेगा, जिससे भविष्य में किसी भी परियोजना से इसे नुकसान पहुंचने का खतरा कम हो जाएगा।

सेतुसमुद्रम परियोजना से जुड़ा है पूरा विवाद

राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग का यह मुद्दा पहली बार 2007 में तब उठा था, जब स्वामी ने सेतुसमुद्रम शिप चैनल परियोजना के खिलाफ याचिका दायर की थी। इस परियोजना के तहत मन्नार और पाक जलडमरूमध्य को जोड़ने के लिए एक 83 किलोमीटर लंबा चैनल बनाया जाना था, जिसके लिए बड़े पैमाने पर खुदाई की जानी थी। आरोप था कि इससे राम सेतु को भारी नुकसान पहुंचेगा। जनवरी 2023 में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र ने कोर्ट को बताया था कि संस्कृति मंत्रालय में राम सेतु को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा देने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, अब तक कोई अंतिम निर्णय न होने के कारण स्वामी ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

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