सिक्किम टनल हादसा, (सोर्स-सोशल मीडिया) 
देश

सिक्किम टनल हादसा: मृतकों की संख्या बढ़कर 20 हुई, मीथेन गैस विस्फोट और दम घुटने से गई जान

Sikkim Tunnel Accident: सिक्किम के नामची में NHPC टनल हादसे में मरने वालों की संख्या 20 हो गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मीथेन गैस विस्फोट और दम घुटने से मौत की पुष्टि हुई है। बचाव ऑपरेशन जारी है।

करुणा नंद शाहवाल

Sikkim Tunnel Methane Gas Blast Accident: सिक्किम के नामची जिले में NHPC की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुए भीषण हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है। बुधवार को बचाव अभियान के दौरान एक और मजदूर का शव बरामद किया गया। सुरंग में कुल 25 मजदूर फंसे थे, जिनमें से अब तक 20 की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि शेष की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, सुरंग के भीतर मीथेन गैस के अचानक विस्फोट से यह हादसा हुआ, जिससे अंदर जहरीला धुआं और गैस फैल गई।

सिक्किम टनल हादसा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

दरअसल सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन सुरंग (NHPC तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना) में भीषण हादसा सोमवार दोपहर करीब 1 बजे हुआ था। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि चट्टानों के भीतर फंसी मीथेन गैस के अचानक हुए विस्फोट के कारण सुरंग ध्वस्त हो गई, जिससे अंदर भारी मात्रा में जहरीला धुआं और गैस भर गई थी।

डॉक्टरों ने क्या बताया?

गंगटोक स्थित एसटीएनएम (STNM) अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार, मृतक मजदूर की मौत का प्रमुख कारण दम घुटना (एस्फिक्सिएशन) था। अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेश मदन रसाइली ने जानकारी दी कि मीथेन गैस बहुत तेजी से फैलती है।

इसकी चपेट में आने वाले व्यक्ति के बचने की संभावना दो से तीन मिनट से भी कम होती है। उन्होंने बताया कि मृतकों शवों पर चोटों के और झुलसने के निशान भी मिले हैं। उनके अनुसार, चोटें सुरंग ढहने के दौरान मलबा गिरने से लगी होंगी, जबकि झुलसने के निशान विस्फोट के कारण हो सकते हैं।

20 की मौत की पुष्टि हो चुकी

सिक्किम के नामची जिले में एनएचपीसी (NHPC) की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुए भीषण हादसे में स्थिति गंभीर बनी हुई है। बुधवार को बचाव अभियान के दौरान एक और मजदूर का शव बरामद किए जाने के बाद मृतकों की कुल संख्या बढ़कर 20 हो गई है। सुरंग में कुल 25 मजदूर फंसे हुए थे, जिनमें से अब तक 20 की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि शेष बचे मजदूरों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।

पहचान और जांच की प्रक्रिया

अब तक बरामद किए गए शवों में से 8 की शिनाख्त (पहचान) पूरी कर ली गई है। पहचान किए गए मजदूरों में 4 मजदूर पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी के रहने वाले हैं। 4 मजदूर पंजाब, उत्तराखंड, असम और सिक्किम से एक-एक हैं। बाकी अन्य शवों की पहचान की प्रक्रिया तेजी से जारी है। अधिकारियों के अनुसार, यदि आवश्यकता पड़ी तो शवों की शिनाख्त के लिए डीएनए टेस्ट भी कराया जाएगा।

युद्ध स्तर पर चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन

बुधवार सुबह सुरंग के अंदर जमा पानी और कीचड़ को बाहर निकालने के बाद बचाव अभियान को दोबारा पूरी ताकत से शुरू किया गया। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और पश्चिम बंगाल के आसनसोल से विशेष रूप से बुलाई गई टीम पानी निकालने और अंदर फंसे लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचने का हरसंभव प्रयास कर रही है।

झारखंड के सीएम ने की बात

इस बीच, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से फोन पर बातचीत की है। उन्होंने सिक्किम के सीएम से झारखंड के प्रभावित मजदूरों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना में झारखंड के खूंटी, हजारीबाग और पश्चिमी सिंहभूम जिलों के कम से कम चार मजदूर कार्यरत थे।

मुआवजे की घोषणा

हादसे के बाद विभिन्न स्तरों पर आर्थिक सहायता और मुआवजे का ऐलान किया गया है। एनएचपीसी (NHPC) के द्वारा प्रत्येक मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपये। सिक्किम सरकार मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और प्रत्येक घायल को 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया है। फिलहाल, जांच एजेंसियां इस दर्दनाक हादसे के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच में जुटी हुई हैं।

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