IIT में क्यों टूट रही छात्रों की सांसें? 20 साल में 171 मौतें, क्या डिप्रेशन और तनाव से जूझ रहे हैं IITian

IIT Student Suicide Cases: आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की संदिग्ध परिस्थिति में मौत के बाद बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। दो दशक में देशभर के 171 आईआईटी छात्रों की आत्महत्या की।
IIT Student Suicide Cases In 20 Years
देश भर के IIT संस्थानों में दो दशक में 171 छात्रों की मौतप्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI
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IIT Student Suicide Cases In 20 Years: देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में शुमार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) एक बार फिर मानसिक तनाव, जातिगत उत्पीड़न और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर सवालों के घेरे में है। आईआईटी बॉम्बे के 22 वर्षीय बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की दुखद मौत के बाद संस्थान में आक्रोश का माहौल है। इस घटना ने देश भर के आईआईटी संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और वहां की व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

दो दशकों में 171 IIT छात्रों की आत्महत्या

IIT कानपुर के पूर्व छात्र और ग्लोबल IIT एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप के संस्थापक धीरज सिंह द्वारा दायर RTI से मिले आंकड़ों के मुताबिक साल 2005 से 2024 के बीच देश भर के IIT संस्थानों में कुल 115 छात्रों ने आत्महत्या की थी। इनमें से 98 मामले कैंपस के अंदर और 17 मामले कैंपस के बाहर के थे। यह आंकड़ा अब बढ़कर 171 तक पहुंच गया है।

IIT मद्रास में सबसे ज्यादा 26 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए। इसके बाद IIT कानपुर में 18, IIT खड़गपुर में 13 और IIT बॉम्बे में 10 छात्रों की मौत हुई है।

IIT बॉम्बे में 2026 में आत्महत्या की तीसरी घटना

चालू वर्ष में आईआईटी बॉम्बे में यह तीसरी और देश भर के आईआईटी में 9वीं छात्र मौत है। 18 सितंबर को परीक्षा हॉल में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर हुए विवाद के कुछ ही घंटों बाद साहिल वाकोडे ने आत्महत्या कर ली।

इससे पहले फरवरी 2026 में इंजीनियरिंग के दूसरे साल के 21 वर्षीय छात्र ने हॉस्टल की छत से कूदकर जान दी थी। इसके बाद फिर जुलाई में आईआईटी बॉम्बे के पवई परिसर में स्थित हॉस्टल नंबर-4 में रहने वाले 20 वर्षीय छात्र सोहिल राजकुमार सांगवान का शव उसके कमरे में मिला।

काउंसलर्स का भारी अभाव

शिक्षा मंत्रालय द्वारा 2024 में जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक 1,000 छात्रों पर कम से कम 1 काउंसलर होना अनिवार्य है। लेकिन वास्तविकता बेहद चिंताजनक है।

  • आईआईटी खड़गपुर: 1 काउंसलर पर 1,500 छात्र

  • आईआईटी दिल्ली: 1 काउंसलर पर 1,214 छात्र

  • आईआईटी कानपुर: 1 काउंसलर पर 1,058 छात्र

संस्थानों में परामर्शदाताओं की यह कमी स्पष्ट करती है कि दबाव से जूझ रहे छात्रों को समय पर मानसिक सहयोग नहीं मिल पा रहा है।

IIT Student Suicide Cases In 20 Years
पिछले 20 सालों में IIT छात्रों की आत्महत्या के मामलेसोर्स: AI

IIT बॉम्बे में बीटेक के छात्र ने की आत्महत्या

बता दें कि IIT बॉम्बे में ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे का शव 18 सितंबर की रात पवई स्थित छात्रावास के उनके कमरे में मिला था। इस घटना के बाद परिसर में तनाव फैल गया और 400 से अधिक छात्र सड़कों पर उतर आए। छात्रों के उग्र प्रदर्शन के कारण मध्य-सत्र परीक्षाओं को भी स्थगित करना पड़ा।

शुरुआत में संस्थान ने दावा किया था कि साहिल को परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग करते और प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड करते पकड़ा गया था। हालांकि, बाद में संस्थान ने अपने इस बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और माना कि जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले ऐसा निष्कर्ष निकालना अनुचित था। इस मामले में आईआईटी बॉम्बे ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को डीन पद से निलंबित कर दिया है।

छात्र के परिजनों ने लगाया जातिगत भेदभाव का आरोप

साहिल के पिता रविंद्र वाकोडे ने पुलिस में दी शिकायत में प्रोफेसर दुल्ला और संस्थान के अन्य उच्च अधिकारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों के अनुसार, साहिल को पिछले तीन महीनों से लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था और उस पर जातिसूचक टिप्पणियां की जा रही थीं।

शिकायत के आधार पर मुंबई पुलिस ने आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे, संबंधित प्राध्यापकों और अधिकारियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। वर्तमान में इस संवेदनशील मामले की जांच मुंबई पुलिस की अपराध शाखा द्वारा की जा रही है।

IIT Student Suicide Cases In 20 Years
IIT Bombay छात्र मौत मामला: संस्थान ने मांगी माफी, प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला सस्पेंड

निदेशक के इस्तीफे और छात्रों की 18 सूत्रीय मांगों पर स्थिति

IIT बॉम्बे ने स्पष्ट किया है कि डायरेक्टर प्रो. शिरीष केदारे ने पद से इस्तीफा नहीं दिया है और इस संबंध में संस्थान के बोर्ड की बैठक बुलाई गई है। इससे पूर्व निदेशक ने देर रात आंदोलनकारी छात्रों से लंबी बातचीत की। छात्रों के अनुसार, डायरेक्टर ने 18 सूत्रीय मांग पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें प्रशासनिक माफी, जांच की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट, छात्रों के साथ खुली बैठक और पीड़ित परिवारों को वित्तीय सहायता शामिल है।

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