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कोलकाता कांड : CBI के बाद ED का शिकंजा, संदीप घोष के चार ठिकानों पर छापा

ED ने कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं के सिलसिले में गिरफ्तार पूर्व प्राचार्य संदीप घोष के घर और उनके ‘करीबी' लोगों के आवासों और कार्यालयों पर आज छापेमारी की।

राहुल गोस्वामी

कोलकाता: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों ने कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए पूर्व प्राचार्य संदीप घोष के घर और उनके ‘करीबी' लोगों के आवासों और कार्यालयों पर आज छापेमारी की।

जानकारी दें कि ED के अधिकारियों ने कोलकाता के ताला इलाके में चंदन लोहया के फ्लैट और कालिंदी स्थित कार्यालय में छापे मारे। वहीं ED की एक अन्य टीम ने उत्तर 24 परगना जिले के चिनार पार्क स्थित घोष के पैतृक घर पर भी छापेमारी की। ED ने बताया कि हमारे अधिकारी लोहया और उनकी पत्नी से पूछताछ कर रहे हैं। संदीप घोष ने टेंडर देने में उनकी मदद की थी।

ED की एक अन्य टीम आरजी कर अस्पताल को उपकरण की आपूर्ति करने वाले संस्थान के कार्यालय में भी दस्तावेजों की जांच कर रही है। सरकारी अस्पताल और संस्थान के बीच कुछ संदिग्ध लेन-देन है। ED के साथ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) भी सरकारी अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है। सीबीआई ने इस मामले में घोष और उनके तीन साथियों को गिरफ्तार किया था।

जानकारी दें कि पश्चिम बंगाल सरकार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में चिकित्सक से कथित दुष्कर्म और उसकी हत्या के विरोध में महीने भर से जारी प्रदर्शनों को लेकर गतिरोध दूर करने के लिए बातचीत की पूर्व शर्त के रूप में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपस्थिति और सीधे प्रसारण की कनिष्ठ चिकित्सकों की मांग बीते बुधवार को खारिज कर दी थी।

इससे पहले राज्य की ममता सरकार ने कहा कि था कि गतिरोध का हल करने के लिए आंदोलनकारी चिकित्सकों के साथ बैठक की कोई शर्त स्वीकार्य नहीं है। वहीं राज्य की स्वास्थ्य राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि चूंकि उन्होंने कुछ शर्तें लगाई हैं, इसलिए ऐसा प्रतीत होता है कि चिकित्सक खुले मन से बैठक नहीं करना चाहते।

चिकित्सकों ने भी इस बाबत राज्य सरकार को एक पत्र भेजा था जिसमें कहा गया था कि मुख्य सचिव द्वारा निर्धारित अधिकतम 15 प्रतिनिधियों के बजाय बैठक में कम से कम 30 प्रतिनिधियों को अनुमति दी जाए, केवल उनकी मांगों पर बातचीत हो और बातचीत का टीवी पर सीधा प्रसारण किया जाए और चर्चा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपस्थिति में ही की जाए।

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