कांग्रेस नेता राहुल गांधी, (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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CAPF Bill 2026: 'सरकार आते ही इस काले कानून को उखाड़ फेकेंगे', राहुल गांधी ने सरकार को घेरा; उठाए कई अहम सवाल

CAPF Bill 2026: बुधवार को विपक्ष द्वारा किए गए वॉकआउट के बीच राज्यसभा में सीएपीएफ विधेयक पारित हो गया। विपक्षी सांसदों ने यह मुद्दा उठाया था कि यह विधेयक 2025 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है।

मनोज आर्या

Rahul Gandhi On CAPF Bill 2026: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को कहा कि अगर अगले आम चुनाव में कांग्रेस सत्ता में आती है तो हम सीएपीएफ बिल 2026 को समाप्त कर देंगे। हाल में केंद्र सरकार ने इस बिल को लोकसभा में रखा था, जिसमें यह प्रावधान है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के शीर्ष पद आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित रहेगा।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में प्रमोशन में अस्थिरता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये जवान देश की सीमाओं पर आतंकवाद और नक्सलवाद से लड़ रहे हैं। इसके साथ ही वह त्योहार और चुनावों के दौरान हमारी सुरक्षा को सुनिश्चित करते हैं। जब उनके अधिकार और सम्मान की बात आती है तो ये सिस्टम उनसे मुंह मोड़ लेती है। सीएपीएफ कर्मी खुद इस भेदभाव के खिलाफ खड़े हैं।

CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट का जिक्र

झारखंड में 1 मार्च को हुए एक आईईडी ब्लास्ट में अपना पैर गंवाने वाले सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि इस बलिदान के बदले उन्हें क्या मिला? 15 वर्षों से अतिक की निष्ठापूर्ण सेवा के बावजूद भी कोई प्रमोशन नहीं और अपनी ही फोर्स का नेतृत्व करने का अधिकार नहीं। कांग्रेस सांसद ने कहा कि इसका कारण यह है कि सभी उच्च पद आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं। यह केवल एक अधिकारी की दुर्दशा नहीं हैं, यह लाखों सीएपीएफ कर्मियों के साथ हो रहे संस्थागत अन्याय को दर्शाता है

'CAPF का मनोबल तोड़ रही सरकार'

सीएपीएफ के मनोबल को तोड़ने के सरकार के प्रयासों की आलोचना करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी अपनी नीतियों के माध्यम से केंद्रीय सशस्त्र बलों का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि  कांग्रेस पार्टी स्पष्ट प्रतिज्ञा करती है कि हमारी सरकार के सत्ता में आते ही, इस भेदभावपूर्ण कानून को निरस्त कर दिया जाएगा। क्योंकि राष्ट्र के लिए लड़ने वालों को बिना किसी अपवाद के नेतृत्व करने का अधिकार मिलना चाहिए।

CAPF Bill 2026 राज्यसभा से पारित

बुधवार को विपक्ष द्वारा किए गए वॉकआउट के बीच राज्यसभा में सीएपीएफ विधेयक पारित हो गया। विपक्षी सांसदों ने यह मुद्दा उठाया था कि यह विधेयक 2025 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है, जिसमें कहा गया था कि "सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (एसएजी) स्तर तक सीएपीएफ के कैडरों में प्रतिनियुक्ति के लिए आरक्षित पदों की संख्या को समय के साथ, उदाहरण के लिए दो साल की अधिकतम सीमा के भीतर, धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए।

इस विधेयक के माध्यम से सीएपीएफ में विशेष महानिदेशक और महानिदेशक के पदों पर भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिन्हें केवल प्रतिनियुक्ति के माध्यम से ही भरा जाएगा।

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