कांग्रेस नेता राहुल गांधी (फोटो- सोशल मीडिया) 
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आरक्षण पर राहुल गांधी का बड़ा दांव, 50% सीमा हटाने की वकालत; कोर्ट को सीधी चेतावनी

Congress नेता हनुमंत राव ने कहा कि राहुल गांधी 50% आरक्षण की सीमा हटाने की वकालत कर रहे हैं। उन्होंने न्यायपालिका से अपील करते हुए कहा, "मैं अदालत से अनुरोध करता हूं कि वह हमारे रास्ते में न आए।"

सौरभ शर्मा

Rahul Gandhi Remark on Reservation: आरक्षण की नीति पर चल रही राष्ट्रीय बहस के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 50% की सीमा को हटाने की पुरजोर वकालत की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी. हनुमंता राव ने सोमवार को यह जानकारी देते हुए न्यायपालिका से एक सीधी अपील भी कर डाली। उन्होंने कहा, "मैं अदालत से अनुरोध करता हूं कि हमारे रास्ते में न आएं।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़ा वर्ग के लिए 42% आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

हनुमंता राव ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10% आरक्षण दिया गया था, तब कांग्रेस ने उसका कभी विरोध नहीं किया। उन्होंने हैरानी जताते हुए पूछा कि अब जब पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने की बात आ रही है तो इसमें बाधा क्यों डाली जा रही है। उन्होंने कहा, "आखिर कोर्ट इस रास्ते में क्यों आ रहे हैं?" उनका यह बयान आरक्षण की सीमा को लेकर चल रही कानूनी और सामाजिक बहस को एक नई दिशा दे सकता है।

तेलंगाना में आरक्षण पर आर-पार की लड़ाई

हैदराबाद में रविवार को इस मुद्दे पर एक अहम गोलमेज बैठक हुई, जिसमें तेलंगाना की राजनीति के बड़े चेहरे शामिल हुए। पूर्व राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, मंत्री वक्ति श्रीहरि, श्रीनिवास गौड़, और गंगुला कमलाकर के साथ-साथ वी. हनुमंत राव जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भी हिस्सा लिया। बैठक में 60 से अधिक पिछड़ा वर्ग संघों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में पिछड़ा वर्ग के लिए 42 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए बिना किसी समझौते के संघर्ष करेंगे।

कानूनी मोर्चे पर बड़ी तैयारी

बैठक की अध्यक्षता कर रहे राज्यसभा सांसद आर. कृष्णैया ने घोषणा की कि पिछड़ा वर्ग आरक्षण की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में देश के जाने-माने वकीलों की टीम खड़ी की जाएगी। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि 42 प्रतिशत आरक्षण पूरी तरह से कानूनी, संवैधानिक और सामाजिक रूप से उचित है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अदालतों या राजनीतिक विरोध के जरिए इस प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया गया तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा और पिछड़ा वर्ग के सभी समुदाय एकजुट होकर इसका मुकाबला करेंगे।

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