Raghav Chadha on Anti Paper Leak Bill: एंटी पेपर लीक बिल पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान पंजाब से सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि कई लोग उनसे पूछ रहे थे कि वे नीट पेपर लीक मामले पर अब तक चुप क्यों थे। इस पर उन्होंने सदन में कहा कि पहले विपक्ष में रहते हुए सरकार से सवाल पूछना उनकी जिम्मेदारी थी, लेकिन अब सरकार का हिस्सा होने के नाते उनकी भूमिका बदल गई है।
उन्होंने कहा, "पहले मेरा काम सवाल उठाना था और मैंने वह जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाई। अब मेरी जिम्मेदारी समाधान देना है। इसलिए मैंने तय किया कि जब सरकार इस समस्या का ठोस समाधान लेकर आएगी, तभी इस विषय पर बोलूंगा।"
राघव चड्ढा ने कहा कि वे चाहें तो कैमरे के सामने बयान देकर राजनीतिक प्रतिक्रिया दे सकते थे, लेकिन उनकी प्राथमिकता समस्या का स्थायी समाधान थी। उन्होंने कहा, "आज सरकार इस बीमारी का इलाज लेकर आई है। इसलिए आज मैं इस बिल के समर्थन में बोल रहा हूं।"
अपने भाषण में राघव चड्ढा ने नीट अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनका गुस्सा और दर्द पूरी तरह जायज है। उन्होंने कहा कि छात्रों ने जिस उम्मीद के साथ अपनी बात सरकार तक पहुंचाई, उसे प्रधानमंत्री ने गंभीरता से सुना और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कदम उठाए।
राघव चड्ढा के अनुसार, सरकार पहली बार पेपर लीक रोकने के लिए व्यापक कानूनी ढांचा लेकर आई है। उन्होंने दावा किया कि मामले की जांच तेज गति से हुई और निर्धारित समय के भीतर चार्जशीट भी फास्ट ट्रैक कोर्ट में दाखिल की गई।
उन्होंने कहा कि भविष्य में नीट परीक्षा को पारंपरिक ओएमआर शीट की बजाय कंप्यूटर आधारित प्रणाली से कराने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। उनका कहना था कि नए कानून में सख्त दंड का प्रावधान अपराधियों के मन में भय पैदा करेगा और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
राघव चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक को किसी एक राज्य या राजनीतिक दल से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार यह पूरे देश में फैला संगठित अपराध है, जो लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर सभी दलों को एकजुट होकर काम करना चाहिए ताकि परीक्षा प्रणाली में छात्रों का विश्वास दोबारा स्थापित किया जा सके।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस परीक्षा में कथित तौर पर ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल कराई जा रही थी और अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूले जा रहे थे।
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उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं बताती हैं कि पेपर लीक किसी एक राज्य की समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चुनौती है। ऐसे में सख्त कानून के साथ-साथ प्रभावी क्रियान्वयन भी आवश्यक है, ताकि मेहनत करने वाले छात्रों के साथ न्याय हो सके।