BJP में जाते ही राघव चड्ढा को लगा झटका! कुछ ही घंटों में घटे 1 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स, जेन-Z ने छोड़ा साथ?

Social Media Backlash Raghav Chadha: भाजपा में शामिल होते ही राघव चड्ढा के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में भारी गिरावट देखी गई है। एक ही रात में करीब 10-11 लाख लोगों ने उन्हें अनफॉलो कर दिया है।
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राघव चड्ढा (डिजाइन फोटो)
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Raghav Chadha Followers Drop After BJP Join: राजनीति में दल बदलना कोई नई बात नहीं है। नेता अक्सर अपनी रणनीति और अवसर के अनुसार पार्टियां बदलते रहते हैं। लेकिन अब राजनीति सिर्फ रैलियों और भाषणों तक सीमित नहीं रह गई है सोशल मीडिया भी किसी नेता की लोकप्रियता का बड़ा पैमाना बन चुका है। फॉलोअर्स की संख्या आज जनता के भरोसे और इमेज का संकेत मानी जाती है।

आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भाजपा (BJP) में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। 24 अप्रैल की शाम जैसे ही उन्होंने बीजेपी जॉइन की, सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। जिस युवा नेता को सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाने वाला चेहरा माना जाता था, अब वही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आलोचना का सामना कर रहा है। उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।

10 से 11 लाख लोगों ने किया अनफॉलो

कुछ ही घंटों में करीब 10 से 11 लाख लोगों ने उन्हें अनफॉलो कर दिया (खबर लिखे जाने तक), और यह संख्या लगातार बदल रही है। इसे केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि जनता के मूड और प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। राघव चड्ढा लंबे समय तक AAP के पढ़े-लिखे और प्रभावशाली युवा चेहरे के रूप में पहचाने जाते रहे हैं। संसद में उनकी सक्रियता और सोशल मीडिया पर मजबूत मौजूदगी ने उन्हें खास पहचान दिलाई थी। लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी बदलने के फैसले ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया है।

Instagram पर घटते फॉलोअर्स

बीजेपी में शामिल होने से पहले उनके इंस्टाग्राम पर लगभग 14.6 मिलियन फॉलोअर्स थे, जो घटकर करीब 13.5 मिलियन रह गए। यानी थोड़े ही समय में लाखों लोगों ने उन्हें अनफॉलो कर दिया। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स इस बदलाव को नोटिस कर रहे हैं और इसे जनता की नाराजगी से जोड़ रहे हैं।

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राघव चड्ढा के Instagram पर घटते फॉलोअर्स (Image- Screengrab)

AAP छोड़ने के बाद बदला माहौल

राघव चड्ढा को AAP की नई पीढ़ी का प्रतिनिधि माना जाता था। उनकी छवि एक ऐसे नेता की थी जो आम लोगों के मुद्दे संसद में उठाते हैं। उन्होंने महंगाई, डिलीवरी वर्कर्स की स्थिति और पितृत्व अवकाश जैसे विषयों पर आवाज उठाई थी, जिससे युवाओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ बनी। हालांकि, अब कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिस बीजेपी की वह पहले आलोचना करते थे, उसी में शामिल होने का फैसला क्यों लिया। कुछ समर्थकों को यह कदम चौंकाने वाला लग रहा है और वे इसे अवसरवाद से जोड़ रहे हैं।

AAP से BJP तक का सफर

राज्यसभा में AAP के 10 सांसदों में से 7 के पार्टी छोड़ने की खबर ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं। राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के बीजेपी में शामिल होने के बाद अन्य नामों पर भी चर्चा तेज है। दो-तिहाई सांसदों के एक साथ अलग होने से दलबदल कानून के तहत उनकी सदस्यता बचने की संभावना मानी जा रही है।

जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम अचानक नहीं हुआ। पार्टी के अंदर लंबे समय से असंतोष पनप रहा था, खासकर पंजाब की राजनीति को लेकर। राघव चड्ढा और अन्य नेताओं ने पहले भी अपनी नाराजगी जाहिर की थी, लेकिन समाधान न मिलने पर यह स्थिति सामने आई।

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