पीएम मोदी (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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दुनिया भर में आर्थिक संकट के बीच PM मोदी ने की आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ बैठक, किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

EAC-PM Modi Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में वैश्विक चुनौतियों के बीच देश की आर्थिक विकास गति को बनाए रखने उपायों पर चर्चा की गई।

स्निग्धा श्रीवास्तव

PM Modi Meeting With Economic Advisory Council: वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अपनी आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में देश की आर्थिक विकास गति को बनाए रखने, अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा पश्चिम एशिया तनाव के बीच उभरती वैश्विक चुनौतियों का डटकर सामना करने के लिए नई रूपरेखा तैयार करने पर जोर दिया गया।

पश्चिम एशिया में जारी टेंशन को लेकर दुनियाभर की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, आपूर्ति शृंखला में पड़ रही बाधा और कमजोर मांग जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे समय में देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को और तेज करने की रणनीतियों पर विचार- विमर्श किया गया। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी और आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्यों ने इस कठिन वैश्विक परिस्थितियों में भी भारत की आर्थिक रफ्तार को बनाए रखने के लिए जरूरी नीतिगत कदमों पर अपने-अपने विचार रखें।

बैठक में किन मुद्दों पर किया गया फोकस

बैठक में भारत के नागरिकों के जीवन को आसान बनाने और बिजनेस करने के लिए सुविधाएं बढ़ाने से जुड़े सुधारों से लेकर केंद्र शासन व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी बनाना बनाने पर चर्चा की गई। साथ ही भारत के निवेश प्रक्रिया को बेहतर बनाने, कम्‍प्‍लायंस के बोझ को कम करने और सर्विस डिस्‍ट्रीब्यूशन में उत्पादकता बढ़ाने के सुधारों पर भी जोर दिया गया। पीएम मोदी ने अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती के लिए लंबे समय तक चलने वाला उपायों पर जोर देने की बात कही ताकि वैश्वि संकटों का सामना आसानी से किया जा सके। बैठक के दौरान ऊर्जा बाजारों, व्यापार मार्गों और व्यापक आर्थिक स्थिरता से जुड़ी चिंताओं की समीक्षा भी की गई, क्योंकि लंबे समय से जारी तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में चुनौतियों भी बढ़ती जा रही है।

भारत की जीडीपी वृद्धि दर भी रही मजबूत

अधिकारियों के अनुसार यह बैठक ऐसे समय में आयोजित किया गया है जब दुनिया भर की बढ़ती अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत ने दुनिया की सबसे तेज़ गति से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखा है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही (चौथी तिमाही) में भारत की जीडीपी वृद्धि दर मजबूत 7.8 प्रतिशत रहने की संभावना है जबकि पूरे वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से कृषि, निर्माण और सेवा क्षेत्रों में तेज वृद्धि के कारण संभव हुआ है।

चुंकी भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में भारत सरकार पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। क्योंकि पश्चिम एशिया तनाव के लंबे समय तक बने रहने से कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गहरा असर पड़ सकता है। बता दें कि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद में देश के प्रमुख अर्थशास्त्री और नीति विशेषज्ञ भी शामिल हुए जो आर्थिक और विकास जैसे मुद्दो पर स्वतंत्र रूप से सुझाव देते है। और सरकार को दीर्घकालिक विकास रणनीतियों और उभरते आर्थिक रुझानों के संबंध में परामर्श प्रदान करती है। -एजेंसी इनपुट के साथ

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