राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत (फोटो- सोशल मीडिया) 
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सब कुछ संघ तय करता...तो इतना समय नहीं लगता, भागवत बोले- मैं 50 साल से शाखा चला रहा वो राज्य

RSS Cheaf Mohan Bhagwat: सरकार और संघ रिश्तों पर मोहन भागवत से एक सवाल पूछा गया उन्होंने कहा कि संघ का हर सरकार के साथ अच्छा समन्वय है। उन्होंने कहा राज्य की भी तमाम सरकारों के साथ अच्छे रिश्ते है।

सौरभ शर्मा

Mohan Bhagwat on RSS and Government: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित शताब्दी समारोह में सरसंघचालक मोहन भागवत ने संघ और सरकार के रिश्तों पर प्रेस कांन्फ्रेंस के दौरान खुलकर बात की। उन्होंने उन तमाम अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा जाता है कि सरकार का एजेंडा संघ तय करता है। दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय समारोह के अंतिम दिन मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ सरकार को केवल सलाह दे सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय लेना सरकार का ही काम है।

यह कार्यक्रम संघ की विचारधारा और भविष्य की दिशा को स्पष्ट करने के लिए आयोजित किया गया था, जिसमें मोहन भागवत ने आत्मनिर्भर भारत और हिंदू राष्ट्र जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अंतिम दिन की प्रेस कॉन्फ्रेंस रही, जहां संघ प्रमुख ने सरकार के साथ अपने संबंधों की रूपरेखा को साफ तौर पर प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि संघ का काम सलाह देना है, शासन चलाना नहीं, और दोनों की अपनी-अपनी भूमिकाएं हैं।

'सब कुछ संघ तय करता है, यह कहना गलत'

जब एक पत्रकार ने मोहन भागवत से पूछा कि क्या सरकार का एजेंडा संघ की तरफ से तय होता है, तो उन्होंने इसका सीधा और स्पष्ट जवाब दिया। भागवत ने कहा, "सब कुछ संघ तय करता है, यह पूर्णतया गलत बात है, ऐसा हो ही नहीं सकता। हम सलाह तो दे सकते हैं, लेकिन निर्णय उस क्षेत्र में उनका (सरकार का) है और हमारे मामले में हमारा है।" उन्होंने आगे कहा कि अगर फैसले संघ को करने होते तो किसी भी काम में इतना समय नहीं लगता। यह बयान संघ की भूमिका को लेकर चल रही बहसों पर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण है।

'मतभेद हैं, मनभेद नहीं'

संघ और सरकार के बीच समन्वय पर जोर देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि संघ का हर सरकार के साथ अच्छा तालमेल रहा है, चाहे वह केंद्र की हो या राज्यों की। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ मुद्दों पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं हैं। उन्होंने कहा, "हमारे स्वयंसेवक जब कोई काम करते हैं और उसके अच्छे नतीजे आते हैं, तो उसे लागू करने पर विचार करना चाहिए। यह एक संघर्ष है, झगड़ा नहीं।" भागवत ने यह भी साफ किया कि संघ किसी भी राजनीतिक दल से परहेज नहीं करता और किसी को पराया नहीं मानता।

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