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मनरेगा में बड़े बदलाव की तैयारी: 100 से बढ़कर 125 दिन का होगा रोजगार, बदल जाएगा नाम

MGNREGA Working Days: केंद्र सरकार मनरेगा में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रही है। अब गारंटीशुदा काम 100 की जगह 125 दिन का हो सकता है और योजना का नाम भी बदलने का प्रस्ताव है।

प्रतीक पाण्डेय

MNREGA Job Guarantee: केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MNREGA) में बड़े संशोधन की योजना बना रही है। इस प्रस्ताव के तहत, पात्र ग्रामीण परिवारों के लिए गारंटीशुदा काम 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किया जाएगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने योजना का नाम बदलकर "पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम" करने पर भी विचार किया है।

रोजगार दिवसों में वृद्धि और नाम परिवर्तन केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में व्यापक बदलावों को अंतिम रूप दे सकती है। इस प्रस्ताव के तहत, पात्र ग्रामीण परिवारों के लिए गारंटीशुदा रोजगार के दिनों की संख्या को मौजूदा 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किया जा सकता है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना का विस्तार करने और साथ ही कानून का नाम बदलकर "पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम" करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की है।

100 से बढ़ाकर 125 हो जाएंगे कार्यदिवस

एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार को कानून का नाम बदलने और गारंटीकृत कार्य दिनों 100 से बढ़ाकर 125 करने के लिए अधिनियम में संशोधन करना होगा। यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब सरकार ने 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होने वाले सोलहवें वित्त आयोग के पुरस्कारों में योजना को जारी रखने के लिए पहले ही अनुमोदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इन राज्यों से उठी थी मांग

औसत रोजगार और राज्यों की मांग मनरेगा के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का दिहाड़ी रोजगार पाने का हकदार होता है। हालांकि मनरेगा अधिनियम की धारा 3 (1) 'कम से कम एक सौ दिन' के काम का प्रावधान करती है, लेकिन यह वास्तव में ऊपरी सीमा बन गई है। वर्ष 2024-25 में योजना के तहत प्रति परिवार उपलब्ध कराए गए औसत रोजगार के दिन लगभग 50 ही रहे। पूर्व में, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सहित कई राज्यों ने मनरेगा श्रमिकों के लिए 100 दिन की कार्य सीमा बढ़ाने की मांग की थी। राज्य 100 दिनों से अधिक का काम प्रदान कर सकते हैं, लेकिन उन्हें इसका वित्तपोषण स्वयं करना होता है, और बहुत कम राज्य ही ऐसा करते हैं। पिछले वित्तीय वर्ष (2024-25) के दौरान सृजित 290 करोड़ व्यक्ति-दिवसों में से, राज्यों द्वारा अपने स्वयं के बजट का उपयोग करके केवल 4.35 करोड़ व्यक्ति-दिवस ही सृजित किए गए थे।

क्या है मनरेगा का हिसाब-किताब?

योजना का मौजूदा परिदृश्य पिछले वर्ष 100 दिन का काम पूरा करने वाले परिवारों की संख्या 40.70 लाख थी, जबकि चालू वित्त वर्ष में यह सीमा पार करने वाले परिवारों की संख्या केवल 6.74 लाख है। 2005 में अपनी शुरुआत के बाद से, मनरेगा ने 4,872.16 करोड़ व्यक्ति-दिवस सृजित किए हैं और योजना के तहत कुल ₹11,74,692.69 करोड़ खर्च किए गए हैं। कोविड महामारी के कारण 2020-21 में काम की मांग में जबरदस्त उछाल देखा गया था।

चालू वित्तीय वर्ष (2025-26) में, 12 दिसंबर 2025 तक 4.71 करोड़ परिवारों ने योजना का लाभ उठाया है। हाल ही में, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने व्यय वित्त समिति (EFC) को योजना जारी रखने के लिए एक प्रस्ताव दिया है, जिसमें 2029-30 तक पांच साल के लिए ₹5.23 लाख करोड़ के परिव्यय की मांग की गई है।

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