BJP Reaction on Congress Crisis in Karnataka: कर्नाटक की सियासत में शनिवार को 'ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी' देखने को मिली, लेकिन भाजपा ने इसे शुद्ध ड्रामा करार दिया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की मुलाकात पर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने तीखा हमला बोला। उन्होंने इस बैठक को 'ब्रेकअप पर मेकअप' वाली कवायद बताया। पूनावाला ने तंज कसते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने जिस तरह एकजुटता का प्रदर्शन किया है, उसके लिए उन्हें बेस्ट एक्टर और बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का ऑस्कर अवॉर्ड दिया जाना चाहिए।
शहजाद पूनावाला ने कहा कि यह सिर्फ अपनी आंतरिक कलह को दबाने और छिपाने की कोशिश है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि जब पार्टी में सबकुछ ठीक था, तो इतने मुद्दों को सुलझाने की नौबत क्यों आई। परमेश्वर और वीरप्पा मोइली के बयानों ने कांग्रेस के भीतर मचे घमासान की पोल खोल दी है। भाजपा प्रवक्ता ने सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नेताओं की इस नाश्ते की टेबल पर कर्नाटक की जनता 'मेन्यू' में थी ही नहीं, वहां सिर्फ और सिर्फ कुर्सी और सत्ता बचाने की चिंता परोसी जा रही थी।
भाजपा प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पर भी कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, 'ब्रेक अप के बाद, ब्रेकफास्ट पे मेक अप का ड्रामा, लेकिन राहुल बाबा कब जागेंगे? दोनों एक्टर्स को आज ऑस्कर अवॉर्ड। कांग्रेस ने फिर से जनता पर सत्ता को तरजीह दी, पूनावाला ने याद दिलाया कि जनता ने इन दोनों नेताओं के बीच पुरानी ट्विटर वॉर भी देखी है। उनका कहना है कि आज जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वह हकीकत नहीं बल्कि एक बेहतरीन अभिनय है, जिसका मकसद सिर्फ दिल्ली हाईकमान को खुश रखना और जनता की आंखों में धूल झोंकना है।
इस सियासी घमासान में जनता दल (सेक्युलर) ने भी कांग्रेस सरकार की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं। जेडीएस ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हाईकमान को अब नाश्ता परोसने के लिए भी दखल देना पड़ रहा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य में किसान गन्ने और मक्के के गिरते दामों से परेशान हैं, हजारों सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर चरमरा गया है। जेडीएस का कहना है कि आम जनता त्रस्त है, लेकिन सीएम और डिप्टी सीएम राज्य के विकास की जगह गुटबाजी संभालने, समर्थकों को खुश करने और कुर्सी बचाने के लिए मंदिर दौड़ने में व्यस्त हैं। राज्य के असली मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।