

Karnataka Congress DK Shivakumar Gave Final Statement: कर्नाटक की राजनीति में शनिवार को एक अहम मोड़ आया जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया। मुख्यमंत्री आवास पर हुई एक खास 'ब्रेकफास्ट मीटिंग' के जरिए दोनों नेताओं ने पार्टी में चल रही बगावत की खबरों को खारिज करते हुए एकजुटता का कड़ा संदेश दिया है। इस मुलाकात के बाद डीके शिवकुमार ने साफ लफ्जों में कहा कि उन्हें और सीएम को जो संदेश देना था, वह दे दिया गया है। इस बयान ने सियासी गलियारों में चल रही अनबन की चर्चाओं को फिलहाल ठंडा कर दिया है।
इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि उनके और उनके डिप्टी के बीच रत्ती भर भी मतभेद नहीं हैं। उनके बगल में बैठे शिवकुमार भी पूरे समय मुस्कुराते नजर आए, जिससे दोनों के बीच की केमिस्ट्री साफ झलक रही थी। शिवकुमार ने कहा कि वे कांग्रेस के वफादार सिपाही हैं और पार्टी हाईकमान जो भी फैसला लेगा, वह उन्हें मंजूर होगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वे जल्द ही राज्य के सिंचाई और शहरी विकास जैसे अहम मुद्दों को लेकर दिल्ली जाएंगे और एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेंगे।
राज्य में कांग्रेस सरकार के ढाई साल पूरे होने पर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं जोरों पर थीं, लेकिन डीके शिवकुमार ने अब अपने तेवर नरम कर लिए हैं। उन्होंने कहा कि भले ही उनके समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता उन्हें मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हों, लेकिन उन्हें खुद कोई जल्दी नहीं है। उन्होंने बताया कि आज की बैठक में न सिर्फ मौजूदा मुद्दों पर बात हुई, बल्कि 2028 के विधानसभा चुनाव और 2029 में राहुल गांधी के नेतृत्व में आगे बढ़ने की रणनीति भी तय की गई। अब इस दोस्ती को और पक्का करने के लिए सिद्धारमैया जल्द ही शिवकुमार के घर डिनर पर जाएंगे, जो यह साबित करता है कि वे विपक्ष के किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
भले ही कांग्रेस के दोनों शीर्ष नेताओं ने 'ऑल इज वेल' का नारा दिया हो, लेकिन विपक्ष इसे मानने को तैयार नहीं है। जेडीएस विधायक निखिल कुमारस्वामी ने इस नाश्ते वाली मुलाकात पर तंज कसते हुए इसे 'इडली डिप्लोमेसी' करार दिया। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस इडली परोस रही है, लेकिन हकीकत यह है कि पार्टी अंदर से पूरी तरह बंटी हुई है। भाजपा और जेडीएस का कहना है कि यह एकजुटता सिर्फ दिखावा है और कर्नाटक की जनता सरकार की इस आपसी कलह का खामियाजा भुगत रही है। विपक्ष ने दावा किया कि 8 दिसंबर से शुरू होने वाले सत्र से पहले यह सिर्फ एक डैमेज कंट्रोल की कोशिश है।