Basmati Rice EU PGI Status India Pakistan GI Claim: यूरोपीय संघ में भारतीय बासमती चावल को संरक्षित भौगोलिक संकेतक (PGI) का दर्जा देने का मामला करीब आठ साल से लंबित है। भारत ने जुलाई 2018 में बासमती के लिए पीजीआई आवेदन किया था, लेकिन अब तक अंतिम पंजीकरण नहीं हो पाया है।
वहीं पाकिस्तान ने भी अपने बासमती के नाम से यूरोपीय संघ में जीआई संरक्षण के लिए आवेदन किया है, जिससे दोनों देशों के बीच बासमती की भौगोलिक पहचान और संरक्षण को लेकर मामला और महत्वपूर्ण हो गया है।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के उपाध्यक्ष एवं ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेशभाई ठक्कर ने कहा कि देरी भारत के लिए चिंता का विषय है।
उनका कहना है कि यूरोपीय बाजार में यदि बासमती नाम का इस्तेमाल लंबे समय तक व्यापक रूप से होता रहा, तो उपभोक्ताओं की नजर में यह किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से जुड़े उत्पाद के बजाय सामान्य सुगंधित और लंबे दाने वाले चावल की पहचान हासिल कर सकता है। इससे भारतीय बासमती की विशिष्ट बाजार पहचान और प्रीमियम कीमत प्रभावित होने की आशंका है।
यूरोपीय आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार पाकिस्तान ने 24 अगस्त 2023 को ‘Basmati’ नाम के लिए PGI आवेदन प्रस्तुत किया था, जिसे अप्रैल 2024 में यूरोपीय संघ के आधिकारिक जर्नल में प्रकाशित किया गया।
पाकिस्तान के आवेदन में उसके कई प्रांतों के साथ भारत के कुछ क्षेत्रों में भी बासमती की खेती का उल्लेख है। आवेदन के प्रकाशन के साथ पंजीकरण के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी।
भारत और पाकिस्तान के दावों का प्रमुख आधार बासमती के भौगोलिक क्षेत्र, इसकी पारंपरिक पहचान और उत्पाद की विशिष्ट विशेषताएं हैं। यूरोपीय आयोग के दस्तावेजों में बासमती को लंबे दाने और विशिष्ट सुगंध वाले चावल के रूप में वर्णित किया गया है।
यूरोपीय आयोग के अनुसार भारत बासमती का प्रमुख उत्पादक है और यूरोपीय संघ में आयात होने वाले बासमती चावल की अधिकांश मात्रा भारत से आती है। ऐसे में जीआई संरक्षण भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार में उत्पाद की पहचान और प्रामाणिकता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
हालांकि बासमती निर्यात के मामले में पाकिस्तान देश ने भारत को कड़ी टक्कर दी है। ठक्कर के अनुसार, गैर-बासमती क्षेत्रों से आने वाले चावल की बासमती नाम से बिक्री जारी रहने पर भविष्य में इस नाम की विशिष्टता को लेकर सवाल बढ़ सकते हैं। हालांकि, ऐसे दावों के संबंध में ठोस प्रयोगशाला प्रमाण और बाजार आंकड़ों को अलग-अलग देखा जाना जरूरी है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर वार्ता 27 जनवरी 2026 को पूरी हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अलग Geographical Indications Agreement पर बातचीत अभी जारी है। यूरोपीय आयोग के अनुसार यह समझौता दोनों पक्षों के भौगोलिक संकेतक उत्पादों को संरक्षण देने के लिए है।
ऐसे में बासमती का जीआई संरक्षण आगामी भारत-ईयू जीआई वार्ता में महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। भारतीय व्यापार जगत की नजर अब इस बात पर है कि यूरोपीय संघ बासमती के भारत और पाकिस्तान से जुड़े दावों का किस आधार पर निपटारा करते हुए भारतीय बासमती को कितना संरक्षण देता है।