यूरोपीय संघ के बड़े नेता होंगे गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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न पुतिन, न ट्रंप! ये दो नेता होंगे रिपब्लिक डे पर चीफ गेस्ट, PM मोदी ने इसलिए भेजा खास न्योता

India EU FTA Deal: भारत ने 77वें गणतंत्र दिवस पर पहली बार EU के दोनों शीर्ष नेताओं को मुख्य अतिथि बनाया, दिखाते हुए वैश्विक राजनीति में अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता और ब्लॉक-स्तरीय कूटनीति की भूमिका।

अक्षय साहू

2026 Republic Day Chief Guest: भारत का 77वां गणतंत्र दिवस इस बार कूटनीति के लिहाज से खास माना जा रहा है। न तो रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और न ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मुख्य अतिथि बनाया गया है। इसके बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार यूरोपीय संघ (EU) के दो शीर्ष नेताओं  एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन को एक साथ गणतंत्र दिवस का चीफ गेस्ट बनने का न्योता दिया है। 

एंटोनियो कोस्टा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हैं, जबकि उर्सुला वॉन डेर लेयेन यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष। ये दोनों पद EU की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं का नेतृत्व करते हैं और 27 देशों के समूह में नीतिगत फैसलों से लेकर वैश्विक रणनीति तक उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। भारत का EU को एक इकाई के रूप में गणतंत्र दिवस का मुख्य अतिथि बनाना इस बात का संकेत है कि भारत अब द्विपक्षीय रिश्तों के साथ-साथ ब्लॉक-स्तरीय कूटनीति को भी प्राथमिकता दे रहा है।

अमेरिका-यूरोप के रिश्तों में खटास

इस समय अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में खटास बढ़ रही है। NATO, व्यापार और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं। ऐसे में EU भारत को एक भरोसेमंद, स्थिर और उभरते वैश्विक साझेदार के रूप में देख रहा है। भारत भी पश्चिमी देशों के साथ संतुलन बनाए रखते हुए अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखना चाहता है। दोनों नेता 25 जनवरी को भारत पहुंचेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में चीफ गेस्ट के रूप में शामिल होंगे। 27 जनवरी को भारत-EU के 16वें शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत और बिजनेस फोरम भी आयोजित होगा।

भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट

सबसे बड़ा एजेंडा भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) है। यह बातचीत 2007 से चल रही है और अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। EU भारत को चीन पर निर्भरता कम करने का विकल्प मानता है, जबकि भारत को यूरोपीय बाजार, टेक्नोलॉजी और निवेश की आवश्यकता है।

इसके अलावा रक्षा, सुरक्षा, क्लीन एनर्जी, हाइड्रोजन और सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन में सहयोग की उम्मीद है। इस न्योते को एक बड़ा कूटनीतिक दांव इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि यह दिखाता है कि भारत अब सिर्फ संतुलन बनाने वाला नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति में दिशा तय करने वाला खिलाड़ी बन चुका है।

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