NDA-INDIA Block Protest at Makar Dwar: दिल्ली में मानसून सत्र के दौरान इंडिया गठबंधन और एनडीए आमने-सामने आ गए है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य नेता संसद परिसर के अंदर मकर द्वार पर INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
यहां पहले से ही एनडीए के सांसद विरोध प्रदर्शन कर रहे है। इस दौरान जमकर एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी हो रही है। ऐसे में दोनों दल आमने-सामने आ गए है, जिससे तनाव का माहौल बन गया है। सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सांसद गुरुवार को संसद के मकर द्वार पर विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे है। यह प्रदर्शन 21 जुलाई को कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के पास किए गए धरने के विरोध में किया जा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) राहुल गांधी विपक्ष की अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं। वे सिर्फ हंगामा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने धरने के बाद कहा, "हम उत्तर प्रदेश से हैं। हम यूपी सरकार के कामकाज को देख रहे हैं और भारत सरकार को भी देख रहे हैं। जवाबदेही किसकी है? जवाबदेही सरकार की थी। ऐसा लगता है कि उनकी काबिलियत सिर्फ खाते भरने तक ही सीमित है और हम उत्तर प्रदेश में इसे बहुत बारीकी से देख रहे हैं। जवाबदेही क्या है? खाते भरने की उनकी काबिलियत ही उनकी जवाबदेही लगती है।"
गौरतलब है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के साथ मिलकर मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के पास धरना दिया था। यह धरना नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वालों पर हुए लाठीचार्ज के खिलाफ था। बाद में पुलिस ने उन्हें कुछ देर के लिए हिरासत में भी लिया था।
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प्रदर्शन के बाद बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा, "आज आप सदन के बाहर के दृश्य देख सकते हैं। कांग्रेस भी बैनर लेकर विरोध-प्रदर्शन करके सदन का समय बर्बाद करती है। पार्टी उन मुद्दों से भागती है जिन पर चर्चा होनी चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा, "पिछले 2-3 दिनों में, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा ने छात्रों और सोनम वांगचुक से बात की। बातचीत से एक बात सामने आई, पेपर लीक के मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और कड़े कानून बनाए जाने चाहिए। लेकिन, कांग्रेस सदन में चर्चा नहीं चाहती; वह सिर्फ राजनीति चाहती है। पीएम ने पेपर लीक मामलों में न्याय दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐतिहासिक फैसला किया है।"