होमी जहांगीर भाभा (सोर्स- सोशल मीडिया)
देश

CIA ने रची थी होमी भाभा के मौत की साजिश? आखिर भारत के आइंस्टीन से क्यों डरती थी अमेरिकी सरकार

Homi Bhabha: होमी जहांगीर भाभा ने भारत के परमाणु कार्यक्रम की नींव रखी थी। महान वैज्ञानिक होने के साथ वे कलाकार और संगीत प्रेमी भी थे। 1966 में विमान हादसे में उनकी मौत हो गई।

अक्षय साहू

Highlights:

  • होमी जहांगीर भाभा को भारत के परमाणु कार्यक्रम का जनक कहा जाता है

  • 1945 में उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की स्थापना की

  • उनके नेतृत्व में भारत का परमाणु अनुसंधान कार्यक्रम आगे बढ़ा

Homi Jehangir Bhabha Birth Anniversary: होमी जहांगीर भाभा भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक होने के साथ महान वैज्ञानिक, चित्रकार और संगीत प्रेमी भी थे। विज्ञान में उनके योगदान के कारण उन्हें 'भारत का आइंस्टीन' कहा जाता है। होमी भाभा का जन्म 30 अक्टूबर 1909 को मुंबई के एक संपन्न पारसी परिवार में हुआ था। उनके पिता जहांगीर होर्मुसजी भाभा प्रसिद्ध वकील थे। उन्होंने कैथेड्रल एंड जॉन कोनन स्कूल और एलफिंस्टन कॉलेज से पढ़ाई की। 1927 में 18 साल की उम्र में वे कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी पहुंचे। यहां उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन उनकी दिलचस्पी भौतिकी में थी।

भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक माने जाते थे होमी भाभा

नील्स बोहर और पॉल डिराक से प्रेरित होकर उन्होंने कॉस्मिक किरणों पर शोध शुरू किया। 1933 में पीएचडी और 1939 में डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि हासिल की। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत लौटने के बाद उन्होंने बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में काम किया। कॉस्मिक किरणों पर उनके शोध ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

TIFR और परमाणु कार्यक्रम की स्थापना

1945 में भाभा ने मुंबई में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) की स्थापना की। सर दोराबजी टाटा के सहयोग से शुरू हुए इस संस्थान का उद्देश्य भारत में उच्चस्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना था।

भाभा को कहा जाता है भारत का आइंस्टीन

1954 में उन्हें भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने ट्रॉम्बे में एटॉमिक एनर्जी एस्टेब्लिशमेंट की स्थापना की, जिसे आज भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) कहा जाता है। उनका तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम यूरेनियम, प्लूटोनियम और थोरियम पर आधारित था। भारत में थोरियम के बड़े भंडार को देखते हुए उन्होंने इसके इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया।

1955 में जिनेवा में पहले अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा सम्मेलन की अध्यक्षता भी भाभा ने की। उनके नेतृत्व में 1956 में एशिया का पहला परमाणु अनुसंधान रिएक्टर 'अप्सरा' शुरू हुआ। 1960 में 'सायरस' रिएक्टर भी चालू किया गया।

प्रधानमंत्री नेहरू ने सौंपी थी परमाणु कार्यक्रम की कमान

वैज्ञानिक के साथ कलाकार भी थे भाभा

भाभा को विज्ञान के अलावा चित्रकला, शास्त्रीय संगीत और वास्तुकला में भी गहरी रुचि थी। वे पियानो बजाते थे और ऑर्केस्ट्रा में हिस्सा लेते थे। TIFR भवन के डिजाइन में भी उनकी अहम भूमिका थी। वे तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के करीबी माने जाते थे।

विमान दुर्घटना में हुई मौत

24 जनवरी 1966 को स्विट्जरलैंड जाते समय एयर इंडिया की फ्लाइट 101 मॉन्ट ब्लांक पर्वत से टकरा गई। इस हादसे में 56 वर्षीय होमी भाभा की मौत हो गई। उनकी मृत्यु भारत के वैज्ञानिक समुदाय के लिए बड़ी क्षति थी। इस दुर्घटना को लेकर CIA की संलिप्तता की अटकलें भी लगाई गईं। 

विमान हादसे में हुआ था निधन

माना जा है कि अमेरिका नहीं चाहता था कि भारत परमाणु हथियार बनाए। जबकि भाभा परमाणु बम बनाने के बेहद करीब पहुंच गए थे। ऐसे में अमेरिकी सरकार ने भाभा को रोकने का जिम्मा CIA को सौंपा था। CIA ने 24 जनवरी 1966 में साजिश के तहत जिस विमान में भाभा सवार थे इसका क्रैश करवा दिया। इसमें भाभा समेत कई विमान में बैठे सभी लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि इसके समर्थन में जांच एजेंसियों को किसी भी प्रकार के ठोस सबूत नहीं मिले थे।

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