

US Army Secretary Dan Driscoll Resigns: अमेरिका में ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सेना के सचिव डैन ड्रिस्कॉल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनके रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के साथ लंबे समय से गंभीर मतभेद चल रहे थे।
रिपोर्टों के अनुसार, ड्रिस्कॉल ने सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात के बाद अपना इस्तीफा सौंपा। हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी तक उनके इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
बताया जा रहा है कि सेना के आधुनिकीकरण, कई वरिष्ठ अधिकारियों को हटाने और कुछ अधिकारियों की पदोन्नति रोकने के फैसलों को लेकर दोनों के बीच मतभेद बढ़ गए थे। ड्रिस्कॉल कथित तौर पर कई बर्खास्तगी और पदोन्नति रोकने के फैसलों के खिलाफ थे।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि ड्रिस्कॉल ने इन मुद्दों को सीधे राष्ट्रपति ट्रंप के सामने उठाया था। इसके बाद से ही उनके पद छोड़ने की संभावना जताई जा रही थी।
ड्रिस्कॉल का इस्तीफा ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी सेना ईरान के साथ करीब छह महीने से चल रहे संघर्ष के बीच खाड़ी क्षेत्र में तैनात है। अमेरिकी सैनिक ईरान के खिलाफ सीधे जमीनी युद्ध में शामिल नहीं हैं, लेकिन ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों से अमेरिकी ठिकानों और सैनिकों की रक्षा में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
अमेरिकी सेना पहले से ही वरिष्ठ नेतृत्व की कमी से जूझ रही है। सेना के प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज को पद से हटाया जा चुका है और उनके उप प्रमुख जनरल जेम्स मिंगस को भी पिछले साल हटा दिया गया था। उनके उत्तराधिकारी के रूप में नामित जनरल क्रिस्टोफर ला-नेव को अभी सीनेट की मंजूरी नहीं मिली है।
ड्रिस्कॉल को कभी-कभी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर भी देखा जाता था। हेगसेथ और डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान संघर्ष को जल्द खत्म करने की उम्मीद जताई थी, लेकिन संघर्ष लंबा खिंचता जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, हेगसेथ ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया है। इन फैसलों को लेकर ड्रिस्कॉल की असहमति दोनों के बीच तनाव की बड़ी वजह बनी।
ड्रिस्कॉल का अगला कदम भी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों में पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल का नाम उनके संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर सामने आ रहा है। पार्नेल को हेगसेथ का करीबी माना जाता है। अगर ड्रिस्कॉल का इस्तीफा आधिकारिक रूप से स्वीकार होता है, तो ये ईरान संघर्ष के बीच ट्रंप प्रशासन और अमेरिकी सैन्य नेतृत्व के लिए एक और बड़ी चुनौती होगी।