ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन (सोर्स- सोशल मीडिया)
देश

भारत में प्रदर्शन के पीछे इस्लामी ताकतें! अमेरिकी पत्रकार ने दी चेतावनी, लाखों डॉलर की फंडिंग का दावा

CJP Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शनों के बीच अस्रा नोमानी की रिपोर्ट में विदेशी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को लेकर दावे किए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

अक्षय साहू

Highlights:

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों के प्रदर्शन जारी हैं।

  • रिपोर्ट में फ्रांस और भारत के प्रदर्शनों के बीच संबंध का दावा किया गया।

  • अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और विदेशी फंडिंग को लेकर सवाल उठाए।

  • नेविल रॉय सिंघम पर भारत में प्रचार गतिविधियों के लिए धन देने के आरोप लगाए गए।

Protest Against Gyanesh Kumar: भारत में इन दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी पार्टियों देशव्यापी प्रदर्शन कर रही हैं। इसी बीच इन प्रदर्शनों को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है जिसने इसमें विदेशी फांडिंग की चर्चा को तेज कर दिया है। रिपोर्ट में फ्रांस में जारी प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा गया है कि अगला नंबर भारत का हो सकता है।

अमेरिकी मीडिया आउटलेट फॉक्स न्यूज ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट पेश की है।  फॉक्स न्यूज ने दावा किया है कि फ्रांस में हो रहे प्रदर्शन के पीछे इस्लामी ताकतों का हाथ है और अगला नंबर भारत का हो सकता है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी फ्रांस में प्रदर्शनों के पीछे इस्लामी ताकतों के हाथ होने की बात कही थी।  

भारत में प्रदर्शनों के पीछे इस्लामी ताकतें 

भारतीय मूल की अमेरिकी पत्रकार अस्रा नोमानी ने फॉक्स न्यूज की अपनी रिपोर्ट में कम्युनिस्ट और सामाजिक संगठनों के कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को लेकर भी चिंता जताई है। नोमानी ने दावा किया कि फ्रांस और भारत में हो रहे प्रदर्शनों के बीच गहरा संबंध है।

अस्रा नोमानी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि जैसा कि आप देख सकते हैं, मैंने जो NEXT: INDIA के तौर पर भविष्यवाणी की थी, वह आज सच में हो रही है। उन्होंने अपनी फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट भी साझा की। नोमानी ने आरोप लगाया कि कुछ विचारधारा से जुड़े लोग कम्युनिस्ट एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए छात्रों के आंदोलनों का उपयोग कर रहे हैं।  

भारत में तनाव बढ़ाने के लिए लाखों डॉलर खर्च

अस्रा नोमानी ने अपनी पोस्ट में आगे शंघाई में रहने वाले कारोबारी नेविल रॉय सिंघम का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि सिंघम ने चीन के प्रॉक्सी के तौर पर काम करते हुए भारत में देश विरोधी प्रोपेगैंडा को बढ़ावा देने और प्रभाव को बढ़ाने के लिए लाखों डॉलर खर्च किए है।  

नोमानी ने विजय प्रसाद को नेविल रॉय सिंघम का करीबी बौद्धिक सहयोगी और आयोजक बताया है। इससे पहले प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि फ्रांस में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों और उन्हें कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन देने वाले नेटवर्क से जुड़े 50 संगठनों की पहचान की गई है।

22.44 मिलियन डॉलर की फंडिंग का दावा

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कारोबारी नेविल रॉय सिंघम ने 2017 में इस केंद्र को 22.44 मिलियन डॉलर की फंडिंग दी थी। इस फंडिंग का हवाला देते हुए रिपोर्ट में विभिन्न देशों में सक्रिय संगठनों के बीच संभावित संबंधों की ओर इशारा किया गया है। 

नोमानी ने दिल्ली में जारी प्रदर्शनों का भी जिक्र किया। इन प्रदर्शनों में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) जैसे संगठनों की भागीदारी बताई गई। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का भी उल्लेख किया।

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