UPI MDR चार्ज पर सरकार का स्पष्टीकरण (सोर्स- सोशल मीडिया)
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UPI पर GST की बात सिर्फ अफवाह, सरकार ने दी सफाई, कहा- MDR नियमों की कमियों को दूर करेंगे

UPI MDR Charge News: UPI लेनदेन पर MDR फीस लगाने के फैसले पर मचे सियासी विवाद के बीच सरकार ने सफाई दी है। सरकार का कहना है कि ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाएगा।

अक्षय साहू

Govt Clarification on UPI MDR Charges: सरकार द्वारा ऑनलाइन पेमेंट्स (UPI) लेनदेन पर MDR फीस लगाने को लेकर इन दिनों सियासी घमासान मचा हुआ है। इसी बीच इसे लेकर अब सरकार का बयान सामने आया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, नियमों को लागू करने में रह गई कमियों को दूर करने की कोशिश की जाएगी। सरकार ने पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ बातचीत की है। सरकार इसके प्रभावी तरीके से लागू होने पर बारीकी से नजर रखेगी ताकि यह पक्का किया जा सके कि मर्चेंट ये फीस ग्राहकों पर न लगाएं। 

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, शेयर बाजार में MDR फीस लागू करने का फैसला काफी सोच-विचार के बाद लिया गया। 0.02% का MDR फीस लगाने से पहले SEBI, स्टॉक एक्सचेंजों और स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत की गई थी। सूत्रों ने यह भी बताया कि UPI पर GST लगाए जाने की खबर मात्र अफवाह है। 

UPI पर GST सिर्फ झूठी अफवाह 

सरकारी सूत्रों ने कहा कि, सरकार MDR को लेकर किसी दबाव में नहीं है। यूपीआई पर जीएसटी एक झूठी अफवाह है। इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट में समायोजित किया जाएगा। अगर कोई मसला होगा तो उस पर GST काउंसिल विचार करेगी। 

सूत्रों के मुताबिक, एमडीआर के कारण हमें नकद लेनदेन में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं दिख रही है। हमें विश्वास है कि नकद लेनदेन में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। 15 अक्टूबर को रोलआउट के बाद यूपीआई लेनदेन में गिरावट की उम्मीद न करें। 

क्या है MDR फीस?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है, जो मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के तहत व्यापारी पर लागू होने वाला शुल्क है। यह शुल्क ग्राहकों से नहीं, बल्कि निर्धारित श्रेणी के व्यापारी लेनदेन पर लिया जाता है।

NPCI ने 15 सितंबर 2026 को घोषणा की कि 2,000 रुपये से अधिक के UPI व्यक्ति-से-व्यापारी भुगतान पर 0.40% एमडीआर लागू होगा। यह नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा।

इसका मतलब है कि P2P (व्यक्ति-से-व्यक्ति) ट्रांसफर और 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। वित्त मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।

MDR को लेकर क्या विवाद है? 

कांग्रेस समेत देश की विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने यह फैसला अमेरिकी लॉबी के दबाव में लिया है। क्योंकि इंडिया के ऑनलाइन पेमेंट मार्केट के लगभग 70 प्रतिशत पर अमेरिकी कंपनियों का कब्जा है, जो लंबे समय से भारत की जीरो-MDR पॉलिसी का विरोध कर रही हैं। हालांकि सरकार ने कहा है कि MDR फीस का आम जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा और यह फीस सिर्फ मर्चेंट UPI लेनदेन पर लागू होगा।

इसके जवाब में कांग्रेस का तर्क है कि सरकार भले ही कहे कि ग्राहक से कोई फीस नहीं लिया जाएगा, लेकिन जब दुकानदार पर ये फीस लगाई जाएगी तो वो पैसा आखिर कहां से आएगा? दुकानदार यह फीस अपनी जेब से नहीं भरेंगे, बल्कि वो चीजों के दाम बढ़ा देंगे जिसका भुगतान आम जनता को ही करना पड़ेगा। कांग्रेस चाहती है कि केंद्र सरकार अपना यह फैसला तुरंत वापस ले। 

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