UPI आज हर किसी की जरूरत बन चुका है चाय से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग तक। लेकिन ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR (Merchant Discount Rate) की चर्चा ने सवाल खड़े किए हैं कि क्या UPI अब फ्री नहीं रहेगा? इन सभी सवालों पर चर्चा के लिए जानी-मानी अर्थशास्त्री मिताली निकोर ने नवभारत लाइव से बातचीत की है। इस बीच मिताली निकोर ने MDR पर काफी स्थिति क्लियर की है।
उन्होंने बताया है की 'Merchant Discount Rate' यह केवल ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर लगेगा। यह पर्सनल (P2P) पेमेंट पर लागू नहीं होगा, बल्कि केवल मर्चेंट/शॉप ट्रांजैक्शन (P2M) पर लगेगा। इतना ही नहीं उन्होंने P2P (Person-to-Person) के बारे में भी जानकारी दी।
उन्होंने बताया की जब दो व्यक्ति आपस में निजी तौर पर पैसे ट्रांसफर करते हैं। उस ट्रांजेक्शन को P2P कहते है। P2M (Person-to-Merchant) के बारें में भी उन्होंने जानकारी दी है। उन्होंने बातचीत में बताया की जब ग्राहक किसी व्यावसायिक/बिजनेस अकाउंट पर भुगतान करता है (जैसे दुकान का QR कोड) मान लीजिए ₹2,001 का ट्रांजैक्शन है, तो 0.4% के हिसाब से लगभग ₹8 का चार्ज बनेगा। यह राशि पेमेंट इकोसिस्टम के अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स में बँट जाएगी।
वहीं छोटे दुकानदारों के सवाल पर उन्होंने बोला की 95% से अधिक छोटे ट्रांजैक्शन ₹2,000 से कम के होते हैं, इसलिए छोटे दुकानदारों/रेहड़ी-पटरी वालों पर इसका सीधा असर नहीं होगा। इसका मुख्य असर मध्यम वर्ग पर पड़ेगा जो ₹2,000 से ₹25,000 तक का लेनदेन UPI से करते हैं शहरों में राशन या आम खरीदारी भी ₹2,000 से ऊपर हो जाती है।
क्या यह लिमिट ₹5,000 या ₹10,000 होनी चाहिए थी, इस पर उन्होंने बोला की नीतिगत समीक्षा की जरूरत है। लोग UPI बंद नहीं करेंगे क्योंकि यह आदत बन चुका है, लेकिन बड़े भुगतानों के लिए वे अन्य माध्यमों (क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या कैश) की ओर रुख कर सकते हैं। व्यापारी संगठनों ने सरकार को ज्ञापन देकर इस नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की है ताकि कारोबार पर बुरा असर न पड़े।