ग्वालियर हादसे के बाद गूगल मैप की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल
देश में अभी तक कई हादसे गूगल मैप के गलत रास्तों के कारण घटित हुई है
नेविगेशन कंपनियों, सड़क निर्माण एजेंसियों और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल की कमी भी प्रमुख कारण
Incorrect Route On Google Maps Increases Risk Of Accidents: ग्वालियर में सड़क हादसे में अब तक 17 लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत ने एक बार फिर गूगल मैप की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सिर्फ एक हादसे का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है, जिसके सहारे हर दिन लाखों लोग अनजान रास्तों पर अपनी मंजिल की चाह में सफर करते हैं। मंजिल तक जल्दी पहुंचने की चाह में जब डिजिटल नक्शा शॉर्टकट दिखाता है, तो लोग बिना ज्यादा सोचे उस रास्ते पर आगे बढ़ते चले जाते हैं। लेकिन क्या हर दिखने वाला रास्ता सुरक्षित भी है?
बीते कुछ वर्षों में देशभर में सड़कों का नेटवर्क तेजी से बढ़ा है। कहीं नए एक्सप्रेसवे बने हैं, तो कहीं पुराने रास्तों का स्वरूप बदल गया है। निर्माणाधीन पुल, अधूरे हाईवे, बंद सड़कें और बदले हुए मार्ग यात्रियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। ऐसे में गूगल मैप जैसे नेविगेशन ऐप लोगों की यात्रा का अहम हिस्सा बन चुके हैं। अनजान शहर हो या गांव की संकरी सड़क, लोग रास्ता खोजने के लिए सबसे पहले मोबाइल स्क्रीन देखते हैं।
लेकिन समस्या तब पैदा होती है, जब डिजिटल नक्शे पर दिख रहा रास्ता वास्तविक परिस्थितियों से मेल नहीं खाता। निर्माणाधीन सड़क को चालू मार्ग समझ लेना, अधूरे पुल की ओर बढ़ जाना या भारी वाहनों का संकरी सड़कों पर पहुंचना गंभीर दुर्घटनाओं की वजह बन सकता है। हालांकि, हर मामले में गूगल मैप्स की गलती मान लेना भी सही नहीं है। इसके लिए संबंधित हादसे की जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
ग्वालियर CSP रवि भदौरिया ने कहा है कि जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक यह ट्रक डबरा मंडी से धान लेकर आ रहा था और चूंकि ये ड्राइवर बाहर के थे। उन्होंने संभवतः गूगल मैप से लोकेशन देखा और छोटा रास्ता चुन लिया है और उस पर आ रहे थे। मंदिर के पहले जो घाटी है, वहां इनके एक ट्रक का प्रेशर रिलीज होने की वजह से ब्रेक फेल हुए और यह दुर्घटना घटित हुई। इस रास्ते पर कभी भारी वाहन नहीं आते थे।
देश में गलत नेविगेशन या अधूरे रास्तों से जुड़े हादसों की खबरें सामने आने के बाद कुछ समय तक प्रशासन, तकनीकी कंपनियों और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। कार्रवाई और सुधार की मांग होती है, लेकिन समय बीतने के साथ बहस भी ठंडी पड़ जाती है। अगली दुर्घटना होने तक वही व्यवस्था और वही सवाल पीछे छूट जाते हैं।
सवाल यह है कि क्या हर हादसे के बाद चर्चा करना ही काफी है? क्या यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए? निर्माणाधीन मार्गों की जानकारी समय पर अपडेट करना, बंद सड़कों को नक्शे पर सही तरीके से दिखाना और खतरनाक रास्तों को लेकर स्पष्ट चेतावनी देना बेहद जरूरी है।
केरल-अक्टूबर 2023: पेरियार नदी में कार गिरने से दो डॉक्टरों की मौत हो गई। हालांकि, पुलिस की शुरुआती जांच ने गूगल मैप की गलती को हादसे का कारण मानने से इनकार किया था।
कासरगोड, केरल-जून 2023: मैप के निर्देशों पर चलते हुए कार बाढ़ में डूबे पुराने पुल पर पहुंच गई। दो लोग घायल हुए, लेकिन दोनों बच गए।
बरेली-बदायूं , उत्तर प्रदेश-नवंबर 2024: रामगंगा नदी पर बने अधूरे पुल से कार नीचे गिर गई। 3 लोगों की मौत। पुलिस ने गलत रास्ता दिखाने के मामले में गूगल के अधिकारी और लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों समेत अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
अलवर, राजस्थान-फरवरी 2025: मैप के निर्देश पर चला ट्रेलर भीड़भाड़ वाले बाजार में घुस गया। दुकानों और वाहनों को नुकसान हुआ। करीब 7 घंटे यातायात प्रभावित रहा।
रत्नागिरी, महाराष्ट्र-जुलाई 2025: कथित शॉर्टकट के रास्ते जा रहा रसायन से लदा ट्रक पलट गया। रसायन के ड्रम जंगल में बिखरे। चालक सुरक्षित बच गया।
ग्वालियर, मध्य प्रदेश-अक्टूबर 2026: ट्रक के प्रतिबंधित मार्ग पर पहुंचने में मैप के सुझाए छोटे रास्ते की भूमिका की जांच। शुरुआती रिपोर्टों में 17 से 20 लोगों की मौतें और 26 से 33 घायल बताए जा रहे हैं।
गूगल मैप रास्ता बताने वाला एक डिजिटल माध्यम है। सड़क की वास्तविक स्थिति की गारंटी नहीं। यात्रियों को संकेतकों, बैरिकेडिंग और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों को प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं, नेविगेशन कंपनियों, सड़क निर्माण एजेंसियों और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल भी जरूरी है, ताकि मार्गों में बदलाव की जानकारी समय पर अपडेट हो सके।
ग्वालियर हादसे के बाद सवाल सिर्फ गूगल मैप की विश्वसनीयता का नहीं, बल्कि तकनीक पर आंख मूंदकर भरोसा करने की आदत का भी है। आखिर ऐसा रास्ता किस काम का, जो मंजिल तक पहुंचाने के बजाय जिंदगी को ही खतरे में डाल दे? डिजिटल नक्शे पर दिखने वाला शॉर्टकट तभी उपयोगी है, जब वह सुरक्षित भी हो। क्योंकि किसी भी सफर में मंजिल से ज्यादा जरूरी है, वहां तक सुरक्षित पहुंचना।