Shehzad Poonawalla Attack on Governments: भाजपा के मुखर प्रवक्ता रहे शहजाद पूनावाला ने पार्टी से अलग होते ही सरकार से तिखे सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने कहा है कि देश के मिडिल क्लास को पूरी तरह से लूटा जा रहा है। पूनावाला ने सवाल पूछा है कि मध्यम वर्ग जितना टैक्स देता है, उसके बदले में उन्हें उतनी सुविधाएं मिलती हैं क्या। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में शहजाद पूनावाला ने कहा कि मीडिल क्लास एटीएम बन चुका है।
अब तक भाजपा की नीतियों को अलग-अलग मंचों से डिफेंड करने वाले शहजाद पूनावाला ने कहा कि जब तक हमें वर्ल्ड-क्लास सुविधाएं नहीं मिल जातीं, तब तक वेतन पाने वाले मध्यम वर्गीय लोगों के लिए इनकम टैक्स जैसी सुविधा को खत्म करने का समय आ गया है।
गौरतलब है कि शहजाद पूनावाला ने 17 अगस्त, 2026 को भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। अपने इस्तीफे की कॉपी उन्होंने अपने एक्स अकाउंट से साझा किया है। भाजपा छोड़ने से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने मिडिल क्लास पर लगने वाले इनकम टैक्स और देश में बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य सेवा को लेकर सवाल उठाना शुरू कर दिए थे। एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने सवाल पूछा है।
शहजाद पूनावाला ने देश की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि परिवारों को हमेशा अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए किसी निजी स्कूलों और ईलाज के लिए किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में ही जाना पड़ता है।
एक्स पर एक पोस्ट में शहजाद पूनावाला ने लिखा कि मीडिल क्लास सभी सरकारों से यह सवाल पूछता है कि अगर हम वैश्विक मानक के हिसाब से टैक्स चुकाते हैं, तो हमें वैश्विक स्तर की सुविधाएं क्यों नहीं मिलती, जैसे कि सरकारी स्कूल, सड़क, सांस लेने के लिए शुद्ध हवा और पीने का साफ पानी? सरकारों को इन सभी सवालों के जवाब देने चाहिए।
उन्होंने कहा कि पर्सनल इनकम टैक्स, GST, टोल, सेस, फ्यूल टैक्स, लोकल टैक्स। इतनी चीजें जनता चुकाती हैं। पूर्व बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि मुझे योगदान देने से कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन इतना सब देने के बाद, मुझे बदले में क्या मिल रहा है?
उन्होंने कहा कि भारत का मिडिल क्लास शुरुआत के तौर पर सिंगापुर जैसी व्यवस्था क्यों नहीं पा सकता। कम टैक्स, बेहतर सड़कें, बेहतर ट्रांसपोर्ट, बेहतर सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर। भारत की जनता को किसी भी तरह से टैक्स वसूलने वाली हर अथॉरिटी की ओर से टैक्स के रूप में वसूले गए एक एक रुपये के लिए जवाबदेही चाहिए।