

Baba Ramdev Gen Z Statement: योग गुरु बाबा रामदेव ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश की युवा पीढ़ी, मौजूदा राजनीतिक माहौल और शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने जहां युवाओं के विरोध-प्रदर्शन और अपनी आवाज उठाने के अधिकार की सराहना की, वहीं जेन-जी के एक वर्ग में हिंसा और नशे जैसी प्रवृत्तियों पर चिंता जताई।
रामदेव ने कहा कि युवाओं को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता। देश में बड़ी संख्या में युवा बेहतर काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ युवा गलत आदतों की ओर भी बढ़ रहे हैं।
बाबा रामदेव ने कहा कि कई जेन-जी युवा अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ हिंसा में भी शामिल हैं। उन्होंने युवाओं में बीड़ी-सिगरेट और शराब के सेवन जैसी आदतों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई-कई बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड बना रहे हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे बुरी आदतों को छोड़कर सकारात्मक सोच और अच्छे कार्यों को आगे बढ़ाएं।
देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल पर रामदेव ने उन लोगों पर निशाना साधा जो देश में हर चीज को गलत बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग राजनीतिक रूप से निराश हैं और केवल प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर देश को किसी को प्रधानमंत्री बनाना होगा तो उसे थोड़ा धैर्य रखना चाहिए। रामदेव ने नेताओं और उनके समर्थकों से जाति, वर्ग और समुदाय के नाम पर समाज में विभाजन पैदा नहीं करने की अपील भी की।
उनके मुताबिक, राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन इसे व्यक्तिगत दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए।
रामदेव ने देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खासकर छोटे और ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों, बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है।
उन्होंने कहा कि कई बच्चे ऐसी समस्याओं के कारण स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं। परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि कहीं किताबें हैं तो शिक्षक नहीं हैं और कहीं शिक्षक हैं तो किताबें उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने पेपर लीक की समस्या का भी जिक्र किया।
योग गुरु ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर शिक्षा व्यवस्था की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो वह इसके खिलाफ आंदोलन शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और जरूरी सुविधाएं मिलना जरूरी है और इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बाबा रामदेव ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की मौजूदा प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि उच्च शिक्षा में दाखिले काफी हद तक प्रतियोगी परीक्षाओं पर निर्भर हो गए हैं, जिससे विद्यार्थियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है।
उन्होंने सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में होने वाले इंटरव्यू पर भी गंभीर आरोप लगाए। रामदेव ने दावा किया कि कई जगह इंटरव्यू में विचारधारा, जाति और पहचान के आधार पर पक्षपात होता है। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की जरूरत पर जोर दिया।