FCRA Amendment Bill 2026: दिल्ली में आज संसद में भारी हंगामा तय है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह और विपक्षी दल आज संसद में आमने-सामने होगा। सदन में रणनीति तय करने के लिए आज सुबह 10 बजे संसद में राज्यसभा में विपक्ष के नेता (LoP) के कक्ष में विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठक होगी। विपक्ष मोदी सरकार के फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन अमेंडमेंट बिल 2026 (FCRA) का कड़ा विरोध करने की तैयारी कर रहा है जिसे इस सप्ताह संसद में पेश किए जाने की उम्मीद है।
इस संशोधन के अनुसार, यदि किसी संगठन का रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है तो विदेशी फंड से बनी संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण और मजबूत हो जाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट किया है कि विपक्ष सरकार के इस कदम को रोकने की योजना बना रहा है, इस पर सोमवार को अंतिम फैसला लिया जाएगा।
मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया कि सभी पार्टियों, विशेषकर फ्लोर लीडर्स की बैठक बुलाने के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी। इसी बीच, महत्वपूर्ण मामलों के पेश होने की उम्मीद में कांग्रेस ने राज्यसभा और लोकसभा में अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है। इससे 10, 11 और 12 अगस्त को संसद में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जा सकेगी। कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन के सभी सहयोगियों से भी आग्रह किया है कि वे इन 3 दिनों में अपने सांसदों की मौजूदगी पक्की करें।
फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल 2026 का मुख्य उद्देश्य फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट 2010 में संशोधन करना है, यह मूल कानून व्यक्तियों, संघों और संगठनों को मिलने वाले विदेशी चंदे को नियंत्रित करता है। इस साल 15 जुलाई के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, देश में 14,449 एफसीआरए रजिस्ट्रेशन सक्रिय थे, जबकि 22,498 रद्द हो चुके है और 15,212 की समय-सीमा समाप्त हो गई थी।
इस नए बिल में एक डेजिग्नेटेड अथॉरिटी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। यदि किसी संस्था का एफसीआरए रजिस्ट्रेशन रद्द होता है, सरेंडर होता है या उसकी समय-सीमा खत्म होती है तो यह अथॉरिटी विदेशी चंदे का नियंत्रण सीधे अपने हाथ में ले लेगी।
ऐसे विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियां शुरुआत में इसी अथॉरिटी के नियंत्रण में रहेंगी और अगर संस्था तय समय में अपना रजिस्ट्रेशन दोबारा नहीं करा पाती है तो इन संपतियों को पूरी तरह से सरकार को ट्रांसफर किया जा सकेगा। इसके अलावा अथॉरिटी के पास संपत्तियों को मैनेज करने और जरूरत पड़ने पर ऐसी संस्थाओं की गतिविधियों पर नजर रखने का अधिकार भी होगा।