

Amit Shah Parliament Monsoon Session: सोमवार 10 अगस्त को एक बार फिर संसद में भारी हंगामा होना तय है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में आज बिल पेश करेंगे। इससे यह संभावना बढ़ गई है कि मानसून सत्र में अब तक चल रहा विपक्षी दलों का गतिरोध खत्म होगा। इस बीच आज केंद्र सरकार के कई अहम बिल पेश करने की संभावना है। संसद में एक ओर तो कांग्रेस गृह मंत्री अमित शाह से छात्रों के साथ हुई बर्बरता को लेकर जवाबदेही की मांग कर रही है।
तो वहीं दूसरी ओर केंद्र सोमवार को संसद में कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में है। सोमवार को लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह से संबंधित केरल नाम परिवर्तन विधेयक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम संशोधन विधेयेक कार्यसूची में शामिल हैं। वहीं, राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी एक विधेयक पेश करेंगी।
दिल्ली में आज भाजपा के रणनीतिकारों ने यह स्वीकार किया है कि संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का लगातार संसद में आने के बाद भी सदन से दूर रहना एक राजनीतिक चूक साबित हुआ है। इससे जनता के बीच भाजपा और उसके शीर्ष नेतृत्व को लेकर गलत संदेश गया है।
यह माना जा रहा है कि इस भूल सुधार के लिए ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एफसीआरए, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम के सहारे जनता से सीधा संवाद करने वाले हैं। यह माना जा रहा है कि जब इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब देंगे तो वह छात्र-युवा आंदोलन से लेकर अन्य उन सभी मुद्दों पर भी अपनी बात रख सकते हैं। जिस पर विपक्ष जवाब देने की मांग कर रहा है।
जेडीयू के एक सांसद ने कहा कि संभव है कि भाजपा के रणनीतिकारों को सदन से दूर रहना उचित लग रहा हो लेकिन इससे भाजपा को लेकर जनता के बीच नकारात्मक धारणा बढ़ी है। उसका असर एनडीए के सहयोगी दलों की छवि पर भी होगा। सरकार की ओर से कोई जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा है।
इसकी जानकारी एनडीए के सहयोगी दलों को नहीं है। यह संभव है कि एफसीआरए बिल पर संबोधन के सहारे सरकार की ओर से सभी मुद्दों पर जवाब आए। लेकिन इसका एक लाभ यह जरूर होगा कि संसद का गतिरोध टूट सकता है। जेडीयू के इस नेता ने कहा कि संभवतः 12 अगस्त को इस बिल पर चर्चा हो सकती है।