साइबर हमला(सांकेतिक तस्वीर) सोर्स- सोशल मीडिया
देश

साइबर अपराधियों के निशाने पर बैंक और नॉन-बैंकिग सॉफ्टवेयर! एजेंसी ने एडवाइजरी जारी कर अलर्ट रहने को कहा

Cyber Attack On Banking System: देश में बैंकिंग और नॉन-बैंकिंग कंपनी का सॉफ्टवेयर इस दिनों साइबर अपराधियों के निशाने पर है। एआई के जरिए कंपनी को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।

नितिन कुमार राय

Highlights

  • साइबर हमले का शिकार हो रहे बैंक और नॉन-बैंकिंग कंपनी

  • एजेंसी ने हमले के ट्रेंड को देखते हुए चेतावनी दी है

  • हमले में AI का इस्तेमाल किया जा रहा है

Cyber Criminal Using AI for Attacking Bank: इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की नेशनल साइबरक्राइम थ्रेट एनालिसिस यूनिट (NCTAU) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT मंत्रालय के CERT-In ने बैंकों, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) और फिनटेक कंपनियों के खिलाफ साइबर-हमलों और उनसे जुड़े साइबर धोखाधड़ी के एक ट्रेंड को देखा है।

एडवाइजरी में कहा गया है कि ये हमले आर्थिक लाभ के लिए किए जा रहे हैं और इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एजेंटों का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे बहुत तेजी से सिस्टम को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। कुछ मामलों में, फंड डिस्बर्समेंट सिस्टम और API के जरिए करोड़ों रुपये के अनधिकृत (बिना अनुमति वाले) ट्रांजैक्शन किए गए हैं।

एडवाइजरी के जरिए अलर्ट किया

एडवाइजरी के अनुसार, हमलावर ऐसे सॉफ्टवेयर का फायदा उठाते हैं जिन्हें अपडेट (पैच) नहीं किया गया है, या फिर इंटरनेट से जुड़े ऐसे सर्वर/IT सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं जिन्हें गलत तरीके से कॉन्फ़िगर किया गया है, ताकि वे पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा सकें। एडवाइजरी के अनुसार, इसमें ग्राहकों की शिकायत दर्ज करने वाला इंटरफेस भी शामिल है। इसमें आगे कहा गया है कि हैकर फिर फंड बांटने वाले ऑटोमेटेड सिस्टम या पेमेंट और फंड ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल होने वाले खास इंटरफेस (API) को निशाना बनाते हैं।

हमलावार रिकॉर्ड मिटा देता है

एडवाइजरी में कहा गया है कि एजेंटिक AI फ्रेमवर्क के इस्तेमाल से ये हमले मशीन की गति से हो सकते हैं। इसके बाद पैसे को 'म्यूल' अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दिया जाता है। ये ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल अपराधी अवैध तरीके से हासिल किए गए पैसों को प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए करते हैं। ये खाते कई अलग-अलग बैंकों में हो सकते हैं, जिससे पैसों को IMPS और NEFT के जरिए तुरंत ट्रांसफर या निकाला जा सकता है। एडवाइजरी में आगे कहा गया है कि इसके बाद हमलावर रिकॉर्ड मिटा देते हैं और अपने निशान छिपा देते हैं, जिससे जांच करना मुश्किल हो जाता है।

चेतावनी देते हुए अलर्ट रहन को कहा

एडवाइजरी में वित्तीय संस्थानों को कुछ कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं, जैसे: पेमेंट के लिए इस्तेमाल होने वाले सभी डिजिटल इंटरफेस की पूरी सूची रखें और पुराने, इस्तेमाल न होने वाले या टेस्ट इंटरफेस को हटा दें या बंद कर दें। API हमलों के जोखिम को पहले से कम करने के लिए, बैंक की 'चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर' टीम, 'ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग' टीम और IT टीम को आपस में मिलकर काम करना चाहिए। दैनिक और प्रति-लेनदेन की सीमाएं तय करें, लाभार्थी के नाम और खातों की पुष्टि करें, और असामान्य गति से होने वाले लेन-देन पर नजर रखें। बैंक यह भी जांचें कि क्या गैर-श्वेतसूची IP से NBFC के एक्सेस टोकन फेल हो रहे हैं।

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