CM Yogi Swarna Bharat Trust Foundation Day: स्वर्ण भारत ट्रस्ट के 25वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। उनके पहुंचते ही ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा। बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ उनका स्वागत किया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। कार्रक्रम को संबोधन में सीएम योगी ने कहा कि विदेशी आक्रमणों और औपनिवेशिक दौर ने भारत की स्वावलंबी ग्रामीण व्यवस्था को कमजोर किया।
स्वर्ण भारत ट्रस्ट का ब्रिज स्कूल और उत्तर प्रदेश के अटल आवासीय विद्यालय अलग राज्यों में होने के बावजूद समान सोच के साथ वंचित बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारा लक्ष्य ऐसी नई पीढ़ी तैयार करना है, जो ग्लोबल भी हो और रूटेड भी, आधुनिक तकनीक से लैस हो, लेकिन हृदय में भारत, संस्कृति पर गर्व, अपनी जड़ों का बोध, समाज के प्रति संवेदनशीलता और ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना रखती हो। तकनीक भेदभाव नहीं करती और नए भारत ने गांव की ताकत को नई तकनीक से जोड़ दिया है। सीएम ने वेंकैया नायडू को उत्तर व दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक व आध्यात्मिक सेतु बताया।
सीएम ने कहा कि राज्यसभा सभापति के रूप में दायित्वों के निर्वहन में यही व्यापक स्वीकार्यता दिखाई देती थी। उनका योगदान राजनीति तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने तेलुगु संस्कृति, खान-पान और वेश-भूषा को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सभ्यता की सबसे बड़ी शक्ति हमारे गांव रहे हैं। सदियों तक गांव अर्थव्यवस्था, सामाजिक जीवन और संस्कृति के केंद्र रहे। वे उत्पादन, ज्ञान और जल संरक्षण के साथ ही कला-शिल्प के केंद्र रहे हैं तथा सामाजिक मूल्यों की मूल इकाई भी रहे हैं। कृषि, पशुपालन, शिल्प, व्यापार, स्थानीय संस्थाएं, सभी एक दूसरे से जुड़ी थीं। गांव की अर्थव्यवस्था एक सर्कुलर इकॉनमी थी। एक का उत्पादन दूसरे की आजीविका बनता था।
सीएम ने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान चेतना की एक नई दिशा दी थी। उनका आह्वान था- 'बैक टू विलेज'। वे 'ग्राम स्वराज' के माध्यम से ऐसा गांव चाहते थे जो आत्मनिर्भर हो, स्वावलंबी हो, अपनी आवश्यकताओं के लिए सक्षम हो और अपने निर्णय स्वयं लेने में समर्थ हो। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए वेंकैया नायडू जी ने 2001 में अपने आठ साथियों के साथ स्वर्ण भारत ट्रस्ट की शुरुआत की थी। ट्रस्ट ने स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर दंत एवं नेत्र चिकित्सा, पशु चिकित्सा से लेकर किसान प्रशिक्षण, महिला प्रशिक्षण से लेकर व्यावसायिक शिक्षा और कंप्यूटर प्रशिक्षण से लेकर विद्यालयों एवं ब्रिज स्कूलों तक विभिन्न क्षेत्रों में अत्यंत सराहनीय कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रेजिडेंशियल ब्रिज स्कूल के माध्यम से स्वर्ण भारत ट्रस्ट वंचित तबके के बच्चों को शिक्षा, भोजन, पुस्तकें, ड्रेस और आवास की सुविधा उपलब्ध कराकर उन्हें फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का सराहनीय कार्य कर रहा है। अक्षरा विद्यालय और स्वर्ण भारती विद्या मंदिर जैसे संस्थानों के माध्यम से ग्रामीण व बीपीएल परिवार के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का भी अभिनव कार्य हो रहा है।
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद में कोई न कोई पारंपरिक हुनर मौजूद है। वाराणसी की साड़ी, भदोही का कालीन, मुरादाबाद का पीतल, फिरोजाबाद का कांच, कन्नौज का इत्र और लखनऊ की चिकनकारी इसकी मिसाल हैं। पीढ़ियों से इस हुनर को आगे बढ़ाने वाले कारीगरों के पास आधुनिक डिजाइन, पूंजी और बाजार की कमी थी। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना शुरू की। हर जिले के एक प्रमुख उत्पाद को चिन्हित कर उसके कारीगरों को डिजाइन प्रशिक्षण, आधुनिक टूल किट, आसान बैंक ऋण तथा मार्केटिंग और एक्सपोर्ट का मंच उपलब्ध कराया गया। ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ के तहत पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण और टूल किट दिए गए।
मुख्यमंत्री ने स्वर्ण भारत ट्रस्ट की ग्रामीण महिलाओं के लिए संचालित प्रशिक्षण व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि इसमें महिलाओं के लिए अलग आवास की व्यवस्था भी है। उत्तर प्रदेश में ‘मिशन शक्ति’ के माध्यम से महिलाओं को ‘बीसी सखी’ के रूप में तैयार किया गया। उन्हें प्रशिक्षण और डिजिटल डिवाइस देकर बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा गया। अब गांव के बुजुर्गों व अन्य लोगों को बैंकिंग सेवाएं घर पर मिल रही हैं और ये काम उसी गांव की बेटियां कर रही हैं। उन्हें अच्छी आय भी हो रही है।
सीएम योगी ने कहा कि करीब 25 करोड़ की आबादी वाला उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में कभी इंसेफेलाइटिस यानी दिमागी बुखार के कारण हर वर्ष मध्य जुलाई से मध्य नवंबर तक हजारों मौतें होती थीं। गोरखपुर से सांसद रहते हुए उन्होंने इस समस्या के खिलाफ लगातार आवाज उठाई और आंदोलन किया, लेकिन समाधान नहीं निकल पा रहा था। पीएम मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनने के बाद स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत हुई। वेंकैया नायडू उस कैबिनेट के महत्वपूर्ण सदस्य थे। ‘हर घर शौचालय’ के लक्ष्य के साथ उत्तर प्रदेश में ‘दस्तक अभियान’ चलाकर घर-घर जागरूकता पहुंचाई गई। इससे दशकों से हजारों लोगों की जान लेने वाली इंसेफेलाइटिस को पूरी तरह नियंत्रित करने और उसके उन्मूलन में सफलता मिली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज तकनीक का युग है और तकनीक का सबसे बड़ा गुण यह है कि वह भेदभाव नहीं करती। प्रधानमंत्री ने तकनीक का प्रभावी उपयोग कर महिला और ग्रामीण सशक्तीकरण को नई गति दी है। जनधन खातों और डीबीटी के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रहा है। आज लगभग 60 करोड़ भारतवासी जनधन खातों का लाभ प्राप्त कर रहे हैं और करोड़ों परिवारों को वित्तीय समावेशन का लाभ मिल रहा है। डिजिटल लेन-देन के मामले में भारत पूरी दुनिया को राह दिखा रहा है। इसका लाभ दुकानदार, महिला, अन्नदाता किसान सभी को मिल रहा है।
समारोह में ट्रस्ट के संस्थापक एवं पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, आंध्र प्रदेश सरकार के नगर प्रशासन एवं शहरी विकास मंत्री पी. नारायणा, आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री वाई. सत्य कुमार यादव, बीजेपी आंध्र प्रदेश के अध्यक्ष पी.बी.एन. माधव, राज्यसभा सांसद बीडा मस्तान राव, स्वर्ण भारत ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. कामिनेनी श्रीनिवास, आंध्र प्रदेश विधानसभा के विधायक सोमीरेड्डी चंद्रमोहन रेड्डी, स्वर्ण भारत ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी दीपा वेंकट, पुष्पा बरपु फाउंडेशन के मैनेजिंग ट्रस्टी एम. हर्षवर्धन आदि उपस्थित थे