

Ganga River in Varanasi: बीते सप्ताह से हो रही मूसलाधार बारिश ने उत्तर प्रदेश के अधिकांश इलाकों में कहर बरपा रखा है। प्रयागराज से लेकर वाराणसी में गंगा घाट व मंदिर डूब चुके हैं तो चित्रकूट में मंदाकिनी की बाढ़ ने तबाही मचा दी है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर स्थिर हो गया है, लेकिन यह अभी भी चेतावनी के निशान से ऊपर बना हुआ है।
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, जलस्तर लगभग 70 मीटर तक पहुंच गया है। नदी के लिए खतरे का निशान 71.26 मीटर है। इस स्थिति के कारण पानी का बहाव उल्टा हो गया है, जिससे वरुण नदी के किनारे रहने वाले लोगों के घरों में पानी घुस गया है और कई मंदिर भी जलमग्न हो गए हैं।
1 सितंबर की सुबह से हो रही तेज बारिश के बाद चित्रकूट में मंदाकिनी नदी फिर से उफान के खतरे के निशान को पार कर गई। पुलिस ने लाउडस्पीकर पर ऐलान कर लोगों को रामघाट से दूर जाने को कहा जबकि प्रयागराज में लोगों को नदी तट की ओर जाने से मना किया गया।
दो दिन पहले मध्यप्रदेश के बरगी बांध से पानी छोड़े जाने के बाद चित्रकूट में तबाही मची थी। मंदाकिनी का जलस्तर 30 फिट तक उठ गया था और रामघाट पर बना पुल बह गया था। चित्रकूट में लोगों को हेलीकाप्टर की मदद से बचाया गया था।
आपदा से निपटने के लिए भारतीय वायुसेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी की टीमों ने बचाव अभियान चलाया था। हेलीकॉप्टर, मोटरबोट और अत्याधुनिक संसाधनों के जरिए जलमग्न हो चुके रामघाट समेत तमाम संवेदनशील इलाकों से 688 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
सोमवार को जलस्तर घटने के बाद लोग लौटे मगर मंगलवार को एक बार फिर से बारिश का कहर शुरू हो गया। चित्रकूट के पुलिस कप्तान अरुण कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में जोरदार बारिश के चलते मंदाकिनी का जलस्तर मंगलवार को फिर से बढ़ने लगा। इसी के चलते लोगों से रामघाट खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया। वाराणसी में भी गंगा खतरे के निशान को छू चुकी है।
मणिकर्णिका घाट पूरी तरह से डूब गया और लोगों को गलियों में और छतों पर शवदाह करना पड़ा। गंगाघाट पर बनी जल पुलिस की चौकी भी डूब गई है। वाराणसी में घाट किनारे बने मंदिरों में पानी घुस गया है और निचले स्थानों पर गलियों में पानी बह रहा है। मंगलवार को दिन के समय लखनऊ व प्रयागराज में अंधेरा छा गया और जोरदार बारिश हुई।
असम के गुवाहाटी में मंगलवार को लगातार बारिश के बीच भूस्खलन की दो अलग-अलग घटनाओं में एक ही परिवार के तीन सदस्यों समेत चार लोगों की मौत हो गई। पहली घटना मथघारिया इलाके में हुई, जहां पहाड़ी का एक हिस्सा खिसककर मकान पर गिर गया। हादसे के समय परिवार के सदस्य घर में सो रहे थे।
मलबे में दबने से दंपति और उनकी नाबालिग बेटी की मौत हो गई, जबकि उनका 19 वर्षीय बेटा बिपलब घायल अवस्था में सुरक्षित निकाल लिया गया। दूसरी घटना सातगांव के कलिताकुची इलाके में हुई, जहां पहाड़ी से एक बड़ा पत्थर मकान पर गिरने से 65 वर्षीय महिला की मौत हो गई।
उत्तर भारत में जारी मूसलाधार बारिश आफत बनकर बरस रही है। उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में अतिवृष्टि और भूस्खलन के कारण भारी तबाही मची है, जहां अलग-अलग हादसों में 9 लोगों की जान चली गई। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में देर रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद पहाड़ी से आया भारी मलबा एक मकान में घुस गया। हादसे के समय सो रहे एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मलबे में दबकर दर्दनाक मौत हो गई।