एलपीजी गैस को मिली सब्सिडी (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया) 
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कैबिनेट का बड़ा फैसला, LPG के दामों में संतुलन बनाने के लिए तेल कंपनियों को दी करोड़ों की सब्सिडी

Cabinet Big Decision: कैबिनेट आज LPG के दाम में संतुलन बनाने के लिए तेल कंपनियों को 30000 करोड़ की सब्सिडी देने का फैसला ले चुकी है। दोपहर1 बजे होने वाली कैबिनेट बैठक में इस बात को मंजूरी दे दी गई।

गीतांजली शर्मा

Balance Price Of LPG : कैबिनेट की आज बैठक हुई। इस बैठक में देश के कई विभागों को लेकर बड़े बड़े फैसले लिए गए। देश को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बार-बार तेल आयात पर जो धमकी मिल रही थी उसके बचाव में एक बड़ा फैसला कैबिनेट ने आज ले लिया है। एलपीजी के दामों में संतुलन को बढ़ाकर तेल की कीमत को संतुलित किया जा सकता है।

केंद्रीय कैबिनेट LPG की कीमतों को स्थिर रखने में मदद करने के लिए तेल कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी की मंजूरी पास कर चुका है। आज दोपहर 1 बजे होने वाली कैबिनेट बैठक में इस सब्सिडी को मंजूरी मिल गई है।

करोड़ों की सब्सिडी देने का एक मात्र मकसद बाजार की कीमत से कम कीमत पर रसोई गैस बेचने वाली सरकारी तेल कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई से बचाना है।

आम लोगों के लिए बड़ी राहत

यह राहत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन जैसी कंपनियों को मिलेगा। ये कंपनियां ग्‍लोबल उतार-चढ़ाव के बावजूद भी भारत में LPG और पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखती हैं, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलती है।

इसके अलावा कैबिनेट ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लिए ₹12,060 करोड़ की मंजूरी दी। शिक्षा क्षेत्र में तकनीकी संस्थानों के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए 4,200 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

तेल कंपनियों ने लिया था बड़ा निर्णय

वर्तमान समय में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के देश पर किए गए वार के बाद, भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने एक बड़ा निर्णय लिया था। इन्होंने टैर‍िफ पर तनाव के बीच रूस से कच्चा तेल खरीदने पर रोक लगाई है।

इसको ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने कंपनियों को करोड़ों की मंजूरी दे डाली। ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने अपने अगले बाइंग साइक‍िल में रूसी ‘यूराल्स’ ग्रेड कच्चे तेल की तुरंत खरीद को टालने का फैसला किया था।

सरकार की ओर से स्पष्ट आदेश आने तक तेल कंपनियों ने इस फैसले को लागू करने का मन बना रखा था। कैबिनेट की यह मंजूरी आम लोगों के साथ-साथ कंपनी के लिए भी मददगार साबित होगी।

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