नई दिल्ली में 26 और 27 अक्टूबर को BRICS संसदीय मंच की बैठक।
13 देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडल लेंगे हिस्सा।
सम्मेलन की थीम है ‘जन-केंद्रित विकास के लिए संसद को मजबूत बनाना’।
BRICS Parliamentary Forum: भारत की संसद में BRICS संसदीय मंच की बैठक आयोजित की जा रही है। इसमें विभिन्न देशों के संसदीय प्रतिनिधि साझा चुनौतियों, कानून निर्माण, डिजिटल तकनीक और विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों की संसदों के बीच सहयोग बढ़ाना और एक-दूसरे के संसदीय अनुभवों से सीखने के अवसर उपलब्ध कराना है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के मुताबिक, वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए संसदों के बीच संवाद, आपसी विश्वास और सहयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि संसदीय कूटनीति अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है।
BRICS संसदीय मंच सदस्य देशों की संसदों के बीच संवाद और सहयोग का माध्यम है। इसकी पहली बैठक जून 2015 में रूस की राजधानी मॉस्को में हुई थी। वर्ष 2023 में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित बैठक के दौरान संसदीय सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे।
BRICS समूह की शुरुआत 2006 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ हुई थी। 2011 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS पड़ा। बाद में समूह का विस्तार हुआ और इसमें नए सदस्य देश शामिल किए गए।
12वां BRICS संसदीय मंच 26 और 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित होगा। प्रतिनिधिमंडलों के सचिवों की बैठक 25 अक्टूबर को रखी गई है, जिसमें संयुक्त वक्तव्य को अंतिम रूप देने पर काम होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन में शामिल होंगे और विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधिमंडलों के नेताओं से मुलाकात करेंगे।
इस बार सम्मेलन की मुख्य थीम ‘जन-केंद्रित विकास के लिए संसद को मजबूत बनाना’ है। चर्चा के चार प्रमुख क्षेत्र होंगे:
संस्थागत मजबूती: लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना।
AI और डिजिटल तकनीक: कृत्रिम बुद्धिमत्ता का नैतिक और जनहितकारी इस्तेमाल।
वैश्विक सहयोग: अंतरराष्ट्रीय शासन व्यवस्था में सुधार और संसदों के बीच तालमेल।
समावेशी विकास: टिकाऊ विकास और आम लोगों के जीवन में सुधार के लिए संसदीय पहल।
इसके अलावा, सदस्य और साझेदार देशों की अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी संसदीय समितियों के अध्यक्ष संसदीय कूटनीति, क्षमता निर्माण और बेहतर कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान पर चर्चा करेंगे।