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जेएनयू की दीवारों पर ‘फ्री उमर खालिद’ और ‘लॉन्ग लाइव नक्सलबाड़ी’ के नारे लिखे होने का ABVP ने दावा किया।
वीर सावरकर की तस्वीर के साथ आपत्तिजनक लेखन का भी आरोप लगाया गया।
ABVP ने वामपंथी छात्र संगठनों और JNUSU की राजनीति पर सवाल उठाए।
JNU Slogan New Controversy: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में दीवारों पर लिखे नारों को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय परिसर की कुछ दीवारों पर ‘FREE UMAR KHALID’ और ‘LONG LIVE NAXALBARI’ जैसे नारे लिखे गए हैं। संगठन ने इन नारों को लेकर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां कैंपस के शैक्षणिक वातावरण को प्रभावित कर सकती हैं।
JNU में वीर सावरकर की तस्वीर के साथ आपत्तिजनक लेखन का आरोप
एबीवीपी ने विश्वविद्यालय परिसर में वीर सावरकर की तस्वीर के साथ आपत्तिजनक बातें लिखे जाने का भी आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय व्यक्तित्वों के प्रति इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। एबीवीपी ने सवाल उठाया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी व्यक्ति या राष्ट्रीय व्यक्तित्व के प्रति अपमानजनक व्यवहार को सही नहीं ठहराया जा सकता।
इस विवाद के बीच एबीवीपी ने वामपंथी छात्र संगठनों और वामपंथी नेतृत्व वाले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं। संगठन का आरोप है कि छात्रों की बुनियादी समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय कैंपस में राजनीतिक नारों और वैचारिक टकराव को बढ़ावा दिया जा रहा है।
एबीवीपी ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर भी उमर खालिद के समर्थन में नारे लगाने का आरोप लगाया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस आरोप पर दूसरे पक्ष की तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
JNU विश्वविद्यालय प्रशासन से जांच की मांग
जेएनयू अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर राष्ट्रीय व्यक्तित्वों का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता। वहीं, जेएनयू मंत्री प्रवीण पीयूष ने कहा कि विश्वविद्यालय किसी एक विचारधारा तक सीमित नहीं है और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है।
एबीवीपी ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने, जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
हाल ही में जामिया मिल्लिया इस्लामिया में भी दीवारों पर लिखे नारों को लेकर विवाद सामने आया था। अब जेएनयू में हुई इस घटना के आरोपों ने छात्र राजनीति और विश्वविद्यालय परिसरों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं पर बहस को फिर तेज कर दिया है।