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UPSC 2025 के 958 सफल उम्मीदवारों की ट्रेनिंग अब तक शुरू नहीं हुई।
मसूरी स्थित LBSNAA में फाउंडेशन कोर्स की तारीख अभी तय नहीं।
OBC क्रीमी लेयर मामले में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण का इंतजार।
OBC Creamy Layer Dispute: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में सफल हुए 958 उम्मीदवारों को अब तक ट्रेनिंग शुरू होने का इंतजार है। आमतौर पर मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में फाउंडेशन कोर्स अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत में शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार सेवा आवंटन की प्रक्रिया में देरी के कारण उम्मीदवारों की ट्रेनिंग भी अटकी हुई है।
इस देरी की मुख्य वजह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की क्रीमी लेयर से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला लंबित होना बताया जा रहा है। केंद्र सरकार ने 11 मार्च 2026 के फैसले पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए 24 अगस्त को शीर्ष अदालत का रुख किया था। इसके बाद 24 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सफल उम्मीदवार अब तक फाउंडेशन कोर्स के लिए बुलावा आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। एक उम्मीदवार ने बताया कि सेवा आवंटन नहीं होने के कारण वे संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने में भी हिचकिचा रहे हैं। वहीं, दूसरे उम्मीदवार ने कहा कि वह नियमित रूप से LBSNAA की वेबसाइट पर अपडेट देख रहे हैं।
अकादमी के एक अधिकारी के मुताबिक, फाउंडेशन कोर्स की तैयारियां चल रही हैं, लेकिन प्रशिक्षण शुरू होने की तारीख अभी तय नहीं की गई है। इस संबंध में उच्च स्तर पर निर्णय लिया जाना है।
इस मामले का असर 2016 के बाद से परीक्षा पास करने वाले लगभग 100 ऐसे उम्मीदवारों पर भी पड़ सकता है, जिनका OBC दर्जा क्रीमी लेयर के दायरे में आने के कारण खारिज किया गया था। क्रीमी लेयर व्यवस्था का उद्देश्य OBC आरक्षण का लाभ अपेक्षाकृत वंचित लोगों तक पहुंचाना है।
गैर-सरकारी सेवाओं में कार्यरत लोगों के लिए आय सीमा 1993 में एक लाख रुपये सालाना निर्धारित की गई थी। बाद में इसमें कई बार संशोधन हुआ और 2017 में इसे बढ़ाकर आठ लाख रुपये सालाना कर दिया गया। 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि क्रीमी लेयर निर्धारित करने के लिए केवल आय को आधार नहीं बनाया जा सकता।
समान सामाजिक परिस्थितियों वाले उम्मीदवारों के साथ अलग-अलग व्यवहार करना भी उचित नहीं है। अब अदालत के स्पष्टीकरण और केंद्र के अगले कदम पर सफल उम्मीदवारों की सेवा आवंटन प्रक्रिया तथा ट्रेनिंग की शुरुआत निर्भर कर सकती है।