Highlights:
इंडिया गेट पर हिरासत में लिए जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने अंकिता भंडारी के माता-पिता को रिहा किया।
राहुल गांधी उनसे मिलने पहुंचे और न्याय की लड़ाई में उन्हें अपना समर्थन देने का भरोसा दिलाया।
2022 में उत्तराखंड के एक रिसॉर्ट में अंकिता भंडारी की कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी।
Ankita Bhandari Parents Released: दिल्ली में इंडिया गेट पर हिरासत में लिए जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने अंकिता भंडारी के माता-पिता को रिहा कर दिया है। रात भर चले विरोध प्रदर्शन के बाद, दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट पर अंकिता भंडारी के माता-पिता को कई विपक्षी नेताओं और प्रदर्शनकारियों के साथ हिरासत में ले लिया था।
अंकिता भंडारी की मां ने भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि, "हम कहना चाहते हैं कि जब तक दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द नहीं हो जाती, हम अपनी बात पर अड़े रहेंगे। अगर हमें यहां बैठने की इजाजत नहीं दी जाती, तो हम अपने घरों में ही भूख हड़ताल पर बैठेंगे।"
साथ ही अंकिता भंडारी के पिता ने 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा है कि, "हम सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हैं। सिक्किम के गवर्नर के तौर पर दुष्यंत कुमार की नियुक्ति रद्द की जानी चाहिए। अगर इसे रद्द नहीं किया गया, तो पूरे देश के लोग सड़कों पर उतरेंगे और सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।"
अंकिता भंडारी मर्डर केस को लेकर अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने पर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "यह कैसी कार्रवाई है? बेबस माता-पिता के साथ बेरहमी भरा बर्ताव, जो चार साल से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। उन्हें न्याय देने के बजाय, मुख्य आरोपी को गवर्नर बनाया जा रहा है और ऊपर से इन माता-पिता के साथ इतनी क्रूरता की जा रही है। कायरों की तरह, वे सुबह छह बजे से पहले आए और युवा महिलाओं को यहां से घसीटकर ले गए। दिल्ली पुलिस का यह कैसा व्यवहार है? दिल्ली पुलिस को शर्म आनी चाहिए।"
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी मर्डर केस में, अंकिता के माता-पिता ने बुधवार को दिल्ली में इंडिया गेट के पास धरना दिया और न्याय की मांग की। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी उनसे मिलने पहुंचे और न्याय की लड़ाई में उन्हें अपना समर्थन देने का भरोसा दिलाया।
एक्स पर एक पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा, "4 साल से अंकिता भंडारी के परिवार को न्याय नहीं मिला है, जबकि एक 'VIP' आरोपी को सुरक्षा मिली और उसे संवैधानिक पद से नवाजा भी गया। महिलाओं के प्रति विरोधी रवैया रखने वाली BJP से किसी अच्छे काम की उम्मीद नहीं की जा सकती एक ऐसी पार्टी जहां बलात्कारियों और हत्यारों का स्वागत माला पहनाकर किया जाता है और अपराधियों को सत्ता का संरक्षण मिलता है। आज, अपने घर से मीलों दूर, अंकिता के माता-पिता इंडिया गेट पर अपनी बेटी के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं। मैं और कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़े हैं। उनके दुख में भी और न्याय की इस लड़ाई में भी।"
वहीं, पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने राहुल गांधी के आरोपों और विरोध-प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलना इस बात का सबूत है कि सरकार ने दोषियों को सजा दिलाने के लिए 'पहले दिन से ही पूरी गंभीरता' से काम किया।
उत्तराखंड सरकार के एक बयान में कहा गया कि आरोपियों को 24 घंटे के भीतर जेल भेज दिया गया था और निष्पक्ष व गहन जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया था। इसके अलावा, आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी।
बयान के अनुसार, जांच के दौरान लगभग 500 पन्नों की एक डिटेल चार्जशीट तैयार की गई, जिसमें अहम सबूत और करीब 100 गवाहों के बयान शामिल थे। अभियोजन पक्ष की ओर से मजबूत दलीलें पेश किए जाने के कारण आरोपियों की जमानत याचिकाएं बार-बार खारिज कर दी गईं और वे पूरे ट्रायल के दौरान जेल में ही रहे। आखिरकार, अंकिता के हत्यारों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
सरकार ने कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान उसने अंकिता के माता-पिता और परिवार की भावनाओं को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी। परिवार के अनुरोध पर सरकारी वकीलों को तीन बार बदला गया। इसके अलावा, जब उसके माता-पिता ने CBI जांच की मांग की, तो मुख्यमंत्री धामी ने इसके आदेश दिए। गौरतलब है कि 2022 में उत्तराखंड के एक रिसॉर्ट में अंकिता भंडारी की कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी।