Ajit Doval China Visit: भारत अगले महीने ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है। माना जा रहा है कि इस अहम बैठक में शामिल होने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ सकते हैं। इसी बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार को चीन दौरे पर जाने वाले हैं। जहां वह अपने चीनी समकक्ष वांग यी और अन्य नेताओं के मुलाकात करेंगे।
जानकारी के मुताबिक, डोभाल इस दौरान वांग यी के साथ सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की बैठक करेंगे। सीमा वार्ता के 25वें दौर का आयोजन मंगलवार को होगा। दोनों अधिकारियों को नामित सीमा वार्ता प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया गया है। इसकी स्थापना साल 2003 में दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के मुद्दों को हल करने के लिए बनाई गई थी।
इससे पहले वांग जून के आखिरी हफ्ते में ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के लिए भारत आए थे। जहां उन्होंने अजीत डोभाल के साथ अहम बैठक की थी। इस दौरान चीनी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने इस बात पर जोर दिया था कि भारत और चीन के लिए एक-दूसरे के मूल हितों का सम्मान करना और दोनों पक्षों की ओर से हासिल की गई सहमति को लागू करने के लिए ठोस कदम उठाया जाना आवश्यक है।
बता दें कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैन्य गतिरोध के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में बुरी तरह से कड़वाहट आ गई थी, लेकिन अब भारत और चीन अपने रिश्तों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। 2024 के अंत से अब तक दोनों पक्षों ने तनाव कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। पिछले साल वांग से मुलाकात के बाद डोभाल ने बड़ा बयान देते हुए कहा था कि भारत-चीन सीमा पर शांति बनी हुई है और द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है।
हालांकि, इस बीच दोनों देशों के बीच कुछ मुद्दों को लेकर एक बार फिर तनाव देखने को मिला है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने हाल ही में चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश में 27 स्थानों और विशेषताओं को उनके मानक नामों से पहचानने पर भारत की आलोचना करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि अरुणाचल प्रदेश भारत का एक अविभाज्य और अभिन्न हिस्सा है और इस वास्तविकता को कोई नहीं बदल सकता।
अजीत डोभाल के चीन दौरे से विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन को लेकर बड़ा बयान दिया है। शनिवार को जयशंकर ने कहा, मुझे लगता है कि हमने 2020 और 2024 के बीच एक खराब दौर का सामना किया और यह मुख्य रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति का परिणाम था।
एस जयशंकर ने आगे कहा कि, सीमा से जुड़े इलाकों में शांति और स्थिरता अच्छे संबंधों के लिए एक अवाश्यक शर्त है और सीमा की स्थिति काफी हद तक स्वाभाविक रूप से संबंधों की स्थिति को निर्धारित करेगी। मेरा मानना है कि अगर स्थिति स्थिर है और सहयोग का माहौल है तो जाहिर है भारत और चीन दोनों ही बहुत बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। कई मायनों में, हम एक-दूसरे के लिए बाजार हैं।