Sanjay Gandhi Plane Crash: भारत के इतिहास में 23 जून की तारीख में कुछ घटनाएं दर्ज हैं, जिसने देश की राजनीतिक हवा का रूख मोड़ दिया। वर्ष 1980 में घटी इस घटना ने पूरे देश की राजनीतिक समीकरण बदल डाले। इस दिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे और उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी संजय गांधी का एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। उनके निधन से देश की सियासी हवा का रुख पूरी तरह से बदल गया।
बता दें, इस हवाई दुर्घटना के वक्त उनका बेटा वरुण मात्र तीन महीने का ही था। संजय गांधी की 23 सितंबर, 1974 में मेनका गांधी से शादी हुई थी। बताया जाता है कि यदि संजय गांधी की मृत्यु नहीं हुई होती तो देश की राजनीति में राजीव गांधी की एंट्री नहीं होती।
इसी दिन एक अन्य विमान हादसा भी हुआ था। 1985 में आज ही के दिन आयरलैंड तट के करीब आसमान में ही एयर इंडिया का एक यात्री विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस दुर्घटना में विमान में सवार 329 यात्रियों की मौत हो गई थी।
मई 1980 में इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी को कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया था। इसके ठीक एक महीने बाद ही हवाई दुर्घटना में संजय की मृत्यु हो गई। दिल्ली फ्लाइंग क्लब का एक नया विमान उड़ाते समय यह हादसा हुआ था। आसमान में एक एरोबेटिक स्टंट के दौरान उन्होंने जहाज का नियंत्रण खो दिया और उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
दुर्घटना में संजय के सिर में गंभीर चोट आई थी, जिससे उनकी तुरंत मौत हो गई। हादसे में उनके साथ विमान में सवार यात्री कैप्टन सुभाष सक्सेना की भी मौत हो गई थी।
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भारत में 70 के दशक में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा घोषित आपातकाल में संजय गांधी की विवादास्पद विवादास्पद भूमिका थी। उस समय संजय गांधी की भारतीय राजनीति में बेबाक और एक दबंग नेता के रूप में पहचान थी। उन्हें कांग्रेस के भविष्य के रूप में देखा जा रहा था। खुशवंत सिंह ने अपनी किताब 'एब्साल्यूट खुशवंत' में लिखा है कि संजय की मौत के बाद से इंदिरा गांधी और मेनका गांधी के रिश्ते में खटास आ गई थी। इसके बाद मेनका ने घर छोड़कर राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई।