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नितेश तिवारी की 'रामायण: पार्ट 1' को नवभारत ने 5 में से 3.5 स्टार दिए हैं।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत शानदार VFX और भव्य विजुअल्स हैं, जो इसे हॉलीवुड स्तर का अनुभव देते हैं।
यश ने रावण के किरदार में अपनी दमदार बॉडी लैंग्वेज और स्वैग से पूरी फिल्म में छाप छोड़ी है।
Ranbir Kapoor Ramayana Movie Review: नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी और नमित मल्होत्रा द्वारा निर्मित बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण: पार्ट 1' बड़े पर्दे पर दस्तक दे चुकी है। रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश स्टारर इस भव्य फिल्म में रामायण की पौराणिक कथा को आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स के साथ पेश किया गया है। 'नवभारत' इस शानदार फिल्म को 3.5 स्टार देता है।
फिल्म का पहला हाफ क्यों थोड़ा धीमा लगता है, वीएफएक्स गुणवत्ता कैसी है, और क्यों यह फिल्म दर्शकों को देखनी चाहिए, यह जानने के लिए पढ़िए यह पूरा रिव्यू। फिल्म की कहानी महर्षि वाल्मीकि की रामायण पर आधारित है, जिसे पूरा देश और दुनिया अच्छी तरह जानती है। स्क्रीनप्ले राइटर श्रीधर राघवन और निर्देशक नितेश तिवारी ने इसे दो भागों में बांटने का फैसला किया, जिससे उन्हें किरदारों की गहराई में जाने का भरपूर समय मिला।
फिल्म रामायण की शुरुआत रावण यानी यश की पिछली कहानी यानी बैकस्टोरी से होती है, जो आगे चलकर राम यानी रणबीर कपूर के प्रवेश के लिए एक बेहतरीन विजुअल और भावनात्मक मंच तैयार करती है। हालांकि, पहले हाफ में हर किरदार को स्थापित करने में काफी समय लिया गया है, जिसके कारण गति थोड़ी धीमी महसूस होती है। लेकिन सेकेंड हाफ में फिल्म अपनी रफ्तार पकड़ती है और एक्शन दृश्यों के साथ दर्शकों को बांधकर रखती है।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका विजुअल इफेक्ट्स कार्य है, जिसे नमित मल्होत्रा की कंपनी 'डीनेग' ने तैयार किया है। कथित तौर पर 4000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से बनी इस फिल्म का हर फ्रेम उसकी भव्यता को दर्शाता है। रावण द्वारा कुबेर से लंका छीनने का दृश्य हो, उसकी शिव भक्ति हो, या कैकेयी को अपनी भूल का अहसास होने का क्षण, निर्माताओं ने भारतीय जनमानस में रची-बसी इस कहानी की मूल आत्मा से कोई छेड़छाड़ नहीं की है। तकनीकी रूप से यह फिल्म हॉलीवुड के किसी भी बड़े प्रोजेक्ट को कड़ी टक्कर देती है।
फिल्म के बैकग्राउंड स्कोर और संगीत के लिए हॉलीवुड के ऑस्कर विजेता संगीतकार हंस जिमर और भारत के ए.आर. रहमान की जोड़ी ने हाथ मिलाया था। हालांकि, इतने बड़े नामों के जुड़ने से जो उम्मीदें थीं, संगीत उस स्तर पर पूरी तरह नहीं पहुंच पाता। कुछ जगहों पर गाने कहानी के प्रवाह में अनावश्यक महसूस होते हैं, हालांकि बैकग्राउंड स्कोर दृश्यों को निखारने में मदद करता है। फिल्म में कोई ऐसा थीम म्यूजिक या गाना नहीं जो आपके जेहन में बस जाए और सिनेमाघर से निकलने के बाद भी आपको याद रहे।
अभिनय के मामले में यश पूरी फिल्म में छा जाते हैं। रावण के रूप में उनका बॉडी लैंग्वेज, स्वाभिमान और एटीट्यूड बेमिसाल है। निर्माताओं ने रावण के दस सिरों की अवधारणा को जिस तरह से दिखाया है, वह तारीफ के काबिल है। रणबीर कपूर ने भगवान राम के रूप में अपनी भूमिका में काफी मेहनत की है। वे एक्शन दृश्यों में बेहद सहज और प्रभावी नजर आते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि रामानंद सागर के धारावाहिक में 'राम' बने अरुण गोविल यहां राजा दशरथ की भूमिका में हैं, जो अपने किरदार में पूरी तरह फिट बैठते हैं। सीता के रूप में साई पल्लवी पर्दे पर आते ही अपनी सादगी और गरिमा से दर्शकों का दिल जीत लेती हैं। कैकेयी के रूप में लारा दत्ता और मंथरा के रूप में शीबा चड्ढा का अभिनय प्रभाव छोड़ता है। लक्ष्मण के किरदार में रवि दुबे ने निष्ठा और आक्रामकता का सही संतुलन बनाए रखा है।
'रामायण: पार्ट 1' देश की विशाल उम्मीदों के बोझ को संभालते हुए एक भव्य और भावनात्मक विजुअल अनुभव देने में सफल रहती है। फिल्म का सबसे बेहतरीन और भावनात्मक क्षण रावण से सीता की रक्षा करते जटायु का युद्ध सीक्वेंस है। दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर की आवाज में जटायु का यह क्लाइमेक्स दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला है।
पहला भाग केवल युद्ध की नींव रखता है, जबकि असली आतिशबाजी हनुमान के रूप में सनी देओल की एंट्री, संजीवनी बूटी का प्रसंग और लंका युद्ध, पार्ट 2 के लिए बचाकर रखी गई है। यदि आप भारतीय सिनेमा में तकनीक और पौराणिक कथाओं के इस अनोखे संगम को देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म बड़े पर्दे पर देखने लायक है।