पंकज त्रिपाठी  (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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छोटे शहर से शुरू हुआ सफर, होटल में किया काम और फिर पंकज त्रिपाठी ने एक्टिंग में बनाई खास पहचान

Pankaj Tripathi Birthday: एक्टर पंकज त्रिपाठी का जीवन चुनौति और लगन की मिसाल है। होटल में काम करने से लेकर जेल जाने तक, हर मुश्किल को पार कर उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

यति सिंह

Pankaj Tripathi Success Story: बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर मायानगरी में अपनी एक्टिंग का परचम लहराने वाले पंकज त्रिपाठी की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगती। अपनी सहज और जीवंत कलाकारी से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले इस एक्टर ने बिना किसी गॉडफादर के यह मुकाम हासिल किया है।

छात्र जीवन के दौरान राजनीति की राह पर चलने से लेकर होटल के किचन में रात-रात भर काम करने तक, उनकी जिंदगी का हर मोड़ संघर्षों से भरा रहा। आइए जानते हैं कि कैसे एक साधारण बैकग्राउंड से आया लड़का कड़ी मेहनत और लगन के बल पर भारतीय सिनेमा का दिग्गज कलाकार बन गया।

राजनीति का जुनून और पुलिस की लाठियों का सामना

छात्र जीवन में पंकज त्रिपाठी का रुझान छात्र राजनीति की तरफ काफी ज्यादा था। बिहार में पढ़ाई के दौरान वह छात्र संगठन से जुड़े और छात्र आंदोलनों में एक्टिव रूप से भाग लेने लगे। इस दौरान उन्हें एक आंदोलन के सिलसिले में पुलिस द्वारा गिरफ्तार भी किया गया और जेल में रहना पड़ा।

जेल में मिली पुलिस की डांट और लाठियों के अनुभव ने उनके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल दी। इस घटना के बाद उन्होंने पॉलिटिक्स की राह छोड़ने का फैसला किया और अपना पूरा ध्यान कला तथा पढ़ाई पर केंद्रित कर लिया।

पंकज त्रिपाठी

होटल में काम और थिएटर का जुनून

पटना में पढ़ाई के दौरान एक्टिंग के लिए उनके मन में गहरी रुचि जागी। अपनी जरूरतों को पूरा करने और एक्टिंग सीखने के लिए उन्होंने शहर के एक बड़े होटल के किचन में काम करना शुरू किया।

वह रात की पाली में होटल में डिशवॉशर और किचन हेल्पर के रूप में काम करते थे और सुबह उठकर थिएटर में नाटकों की प्रैक्टिस किया करते थे। लगातार दो सालों तक बिना रुके और थके उन्होंने इस दिनचर्या को अपनाया। इस मुश्किल समय ने उनके अंदर अनुशासन और सहनशीलता को गहराई से मजबूत किया।

नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से एक्टिंग के दांव-पेंच

होटल की नौकरी के साथ-साथ रंगमंच पर लगातार काम करते हुए उन्होंने अपनी कला को निखारा। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के फेमस नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एंट्री ली, जहां उन्होंने एक्टिंग की औपचारिक बारीकियां सीखीं।

साल 2004 में मुंबई आने के बाद उन्हें लंबे समय तक छोटे और मामूली रोल से ही संतोष करना पड़ा। अभिषेक बच्चन की फिल्म रन और अजय देवगन की फिल्म ओमकारा जैसी शुरुआती फिल्मों में छोटे रोल करने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सही मौके का इंतजार करते रहे।

गैंग्स ऑफ वासेपुर से मिली बड़ी पहचान

साल 2012 में आई अनुराग कश्यप की फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर उनके करियर के लिए सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई। इस फिल्म में उनके रोल को दर्शकों और समीक्षकों ने काफी पसंद किया।

इसके बाद मिर्जापुर वेब सीरीज में कालीन भैया के रोल ने उन्हें घर-घर में पॉपुलर बना दिया। स्त्री, लूडो, मसान और मिमी जैसी कई फिल्मों में उनकी एक्टिंग को व्यापक सराहना मिली। आज अपनी मेहनत के दम पर वह बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकारों की श्रेणी में शीर्ष पर गिने जाते हैं।

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