नील नितिन मुकेश (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम) 
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Birthday Special: हीरो से विलेन बने नील नितिन मुकेश, खतरनाक किरदारों से बना ली नई पहचान

Neil Nitin Mukesh Career: नील नितिन मुकेश ने हीरो के तौर पर सीमित सफलता के बाद विलेन के किरदारों में खुद को स्थापित किया। वजीर, गोलमाल अगेन और साहो जैसी फिल्मों में उनके खलनायक अवतार को सराहा गया।

सोनाली झा

Neil Nitin Mukesh Birthday Special Story: बॉलीवुड एक्टर नील नितिन मुकेश ने अपने करियर में जोखिम उठाकर खुद को दोबारा साबित किया। लंबे समय तक हीरो के तौर पर पहचान बनाने की कोशिश करने वाले नील को जब वैसी सफलता नहीं मिली, तो उन्होंने अपनी राह बदली और विलेन के किरदारों में खुद को पूरी मजबूती से स्थापित किया। आज नील को बॉलीवुड के उन एक्टर्स में गिना जाता है, जिनका खलनायक अवतार दर्शकों के दिलों में डर और असर छोड़ जाता है।

नील नितिन मुकेश का जन्म 15 जनवरी 1982 को मुंबई में हुआ था। उनका ताल्लुक एक प्रतिष्ठित संगीत परिवार से है। पिता नितिन मुकेश मशहूर गायक हैं और दादा मुकेश हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े गायकों में शुमार किए जाते हैं। बचपन से ही नील का झुकाव कला और सिनेमा की ओर रहा। उन्होंने महज छह साल की उम्र में फिल्म ‘विजय’ से बतौर बाल कलाकार अभिनय की शुरुआत कर दी थी। इसके बाद ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ में भी उन्होंने अभिनय किया।

नील नितिन मुकेश की बॉलीवुड में एंट्री

साल 2007 में नील ने बतौर लीड एक्टर फिल्म ‘जॉनी गद्दार’ से बॉलीवुड में एंट्री की। इस फिल्म में उनके अभिनय को खूब सराहा गया और लगा कि इंडस्ट्री को एक नया टैलेंट मिल गया है। इसके बाद ‘न्यूयॉर्क’, ‘लफंगे परिंदे’, ‘प्लेयर’, ‘3जी’ और ‘आ देखें जरा’ जैसी फिल्मों में उन्होंने हीरो के तौर पर काम किया, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर वह बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाए। धीरे-धीरे नील का करियर ठहराव की स्थिति में पहुंचने लगा।

नील नितिन मुकेश का करियर

यहीं से उनके करियर में बड़ा मोड़ आया। नील ने पारंपरिक हीरो की छवि छोड़कर विलेन के किरदारों को अपनाने का फैसला किया। फिल्म ‘वजीर’ में उनका नकारात्मक रोल दर्शकों को खूब पसंद आया। इसके बाद ‘गोलमाल अगेन’ और प्रभास स्टारर ‘साहो’ में उनके खलनायक अवतार ने साबित कर दिया कि वह विलेन के रोल में ज्यादा असरदार हैं। उनकी आंखों की ठंडक और डायलॉग डिलीवरी ने दर्शकों के मन में डर पैदा किया।

साउथ इंडस्ट्री में किया विलेन का रोल

नील ने सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि साउथ इंडस्ट्री में भी विलेन के रूप में काम किया। तमिल और तेलुगू फिल्मों में उनकी मौजूदगी ने उन्हें पैन-इंडिया पहचान दिलाई। इसके अलावा उन्होंने ‘बायपास रोड’ जैसी फिल्म का निर्माण भी किया और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे। कुल मिलाकर, नील नितिन मुकेश की कहानी इस बात की मिसाल है कि सही समय पर लिया गया जोखिम और खुद को नए रूप में ढालने की हिम्मत किसी भी कलाकार के करियर को नई दिशा दे सकती है।

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