नाना पाटेकर (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)  
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नाना पाटेकर का बड़ा खुलासा, 13 साल की उम्र में शुरू की नौकरी, बोले- जिंदगी ने जो सिखाया वो कोई स्कूल...

Nana Patekar OTT Debut: नाना पाटेकर ने अपने संघर्ष भरे बचपन, 13 साल की उम्र में शुरू की नौकरी और ओटीटी डेब्यू ‘संकल्प’ को लेकर खुलकर बात की। तो चलिए जानते हैं उनके जीवन के अनसुने किस्से।

स्नेहा मौर्या

Nana Patekar Struggle Story: अपनी बेबाकी और गहरी सोच के लिए पहचाने जाने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर इन दिनों अपने ओटीटी डेब्यू को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने निर्देशक प्रकाश झा के वेब शो संकल्प के जरिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कदम रखा है। इस शो में वह ‘माट साब’ नाम के किरदार में नजर आ रहे हैं, जिसे दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

हाल ही में एक बातचीत के दौरान नाना पाटेकर ने अपने बचपन, संघर्ष और अभिनय सफर से जुड़ी कई दिलचस्प बातें साझा कीं।

नाना पाटेकर का गांव से शहर तक का सफर

नाना पाटेकर ने मजाकिया अंदाज में बताया कि उन्हें पढ़ाने की कोशिश तो बहुत लोगों ने की, लेकिन कोई उन्हें सही तरीके से पढ़ा नहीं पाया। उन्होंने बताया कि उनका बचपन गांव में बीता और अंग्रेजी की पढ़ाई उन्होंने पांचवीं कक्षा से शुरू की थी। जब वह शहर आए तो वहां के बच्चे धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलते थे। नाना को लगता था कि शायद वे उनका मजाक उड़ा रहे हैं। ऐसे में उन्होंने डराने वाला अंदाज अपना लिया, जिससे दूसरे बच्चे ही घबरा जाते थे।

थिएटर से शुरू किया सिनेमा में करियर

नाना ने बताया कि बचपन से ही उन्हें थिएटर और फिल्मों में गहरी दिलचस्पी थी। उनके घर के आसपास कई थिएटर थे, जहां वह अक्सर जाकर पोस्टर और फिल्मों की झलकियां देखते थे। जब उनकी फिल्म अंकुश रिलीज हुई, तब निर्देशक एन. चंद्रा ने एक खास पोस्टर बनवाया था, जिस पर लिखा था ‘नाना पाटेकर वॉच आउट’। उस समय वह ज्यादा मशहूर नहीं थे, लेकिन मुंबई के दादर से बांद्रा तक जाकर उन्होंने अपने पोस्टर खुद देखे। नाना पाटेकर ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने सिर्फ 13 साल की उम्र में नौकरी शुरू कर दी थी। उस समय उन्हें रोज करीब 16 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था और महीने की तनख्वाह सिर्फ 35 रुपये मिलती थी। उन्होंने कहा कि जिंदगी के अनुभवों ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया है और जो सीख हालात देते हैं, वह किसी स्कूल या किताब से नहीं मिल सकती।

निर्देशन से क्यों अभिनेता ने बना ली दूरी

नाना पाटेकर ने 1991 में आई फिल्म प्रहार का निर्देशन किया था, लेकिन उसके बाद उन्होंने कोई फिल्म डायरेक्ट नहीं की। इसके पीछे की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि निर्देशन में काफी समय और जोखिम होता है।

उनका कहना है कि उस दौर में उन्हें घर बनाना था और पैसों की जरूरत थी, इसलिए उन्होंने अभिनय पर ज्यादा ध्यान दिया। हालांकि उन्हें कई बेहतरीन निर्देशकों के साथ काम करने का मौका मिला, जिससे उन्हें कभी यह महसूस नहीं हुआ कि उन्होंने कुछ खो दिया है।

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