M S Subbulakshmi Birth Anniversary: भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में एम एस सुब्बुलक्ष्मी का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। कर्नाटक संगीत को दुनियाभर में पहचान दिलाने वाली इस महान गायिका की आवाज में ऐसा जादू था कि आम श्रोताओं से लेकर देश के बड़े नेता तक उनके मुरीद थे। महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उनकी गायिकी की जमकर तारीफ करते थे।
एम एस सुब्बुलक्ष्मी का जन्म 16 दिसंबर को मदुरई में हुआ था। उन्हें बचपन से ही संगीत में काफी दिलचस्पी थी। बताया जाता है कि वह ग्रामोफोन से बेहद प्रभावित थीं और छोटी उम्र में कागज का माइक बनाकर गानों की प्रैक्टिस किया करती थीं। महज आठ साल की उम्र में उन्होंने पहली बार स्टेज पर प्रस्तुति दी थी। कुंभकोणम में आयोजित महामहम उत्सव में उनकी गायिकी ने संगीत के जानकारों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके दो साल बाद यानी करीब 10 साल की उम्र में उनका पहला गाना रिकॉर्ड होकर रिलीज हुआ।
सुब्बुलक्ष्मी ने कर्नाटक संगीत की शिक्षा सेम्मनगुड़ी श्रीनिवास अय्यर से ली थी। इसके अलावा उन्होंने पंडित नारायण राव व्यास से शास्त्रीय संगीत की भी ट्रेनिंग हासिल की। आगे चलकर उन्होंने मद्रास संगीत अकादमी से भी संगीत की शिक्षा ली और कई भाषाओं में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। साल 1936 में पत्रकार टी सदाशिवम आनंद ने एक तमिल साप्ताहिक में उनके बारे में लेख लिखा था। इसके बाद उनके कार्यक्रमों में दर्शकों की संख्या बढ़ने लगी। बाद में सदाशिवम और सुब्बुलक्ष्मी की दोस्ती हुई और दोनों ने शादी कर ली।
एम एस सुब्बुलक्ष्मी की गायिकी से महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू भी काफी प्रभावित थे। गायिकी से होने वाली कमाई का एक हिस्सा वह कस्तूरबा फाउंडेशन को भी देती थीं। गांधी जी ने उनकी आवाज की तारीफ करते हुए कहा था कि अगर सुब्बुलक्ष्मी सिर्फ सुरों में गाएं या केवल शब्दों का उच्चारण करें, तब भी वह किसी और का गायन सुनने के बजाय उन्हें सुनना पसंद करेंगे। वहीं नेहरू ने उनकी महानता के आगे खुद को बेहद छोटा बताते हुए उन्हें 'संगीत की मल्लिका' कहा था। संगीत के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए एम एस सुब्बुलक्ष्मी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया।