भूपेन हजारिका  (फाइल फोटो)
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शोहरत मिली बेशुमार, लेकिन नहीं बचा परिवार, आखिरी वक्त तक भूपेन हजारिका को अकेलेपन ने घेरा

Bhupen Hazarika Birthday: महान संगीतकार भूपेन हजारिका की लाइफ जर्नी बेहद प्रेरणादायक रही। बेहद कम उम्र से संगीत की शुरुआत करने वाले भूपेन हजारिका ने जीवन में भारी पैसों की तंगी का भी सामना किया।

यति सिंह

Bhupen Hazarika Biography: भारतीय संगीत के इतिहास में कुछ ऐसी शख्सियतें हुई हैं जिनकी आवाज और धुनों ने लोगों के दिलों पर गहरा असर डाला। असम की धरती पर जन्मे महान संगीत साधक भूपेन हजारिका एक ऐसा ही नाम हैं जिन्होंने अपनी अद्वितीय प्रतिभा के दम पर न केवल नॉर्थईस्ट बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया। 10 भाई-बहनों में सबसे बड़े भूपेन को बचपन से ही संगीत का गहरा शौक था। सिर्फ 10 साल की उम्र में अपनी गायकी की शुरुआत करने वाले इस कलाकार ने संगीत की दुनिया में एक नया रिकॉर्ड बनाया। उनकी जीवन यात्रा सफलता, संघर्ष और कई उतार-चढ़ावों से भरी रही है।

10 साल की उम्र और गाने की पहली रिकॉर्डिंग

भूपेन हजारिका के अंदर छिपे संगीतकार को पहचाना फिल्म मेकर ज्योतिप्रसाद अग्रवाल ने। उनकी सुरीली आवाज से प्रभावित होकर उन्होंने भूपेन को पहला मौका दिया। कोलकाता में साल 1936 में उन्होंने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था। इसके बाद महज 13 साल की उम्र में उन्होंने खुद अपने गीत लिखने शुरू कर दिए थे।

फिल्म रूदाली का सबसे फेमस गाना जिसे लता मंगेशकर ने अपनी मैजिक आवाज दी है और संगीत भूपेन हजारिका ने दिया था। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वह हायर एजुकेशन के लिए अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी पहुंचे, जहां उन्होंने जनर्लिज्म में पीएचडी की डिग्री हासिल की। वापस लौटकर उन्होंने गुवाहाटी के ऑल इंडिया रेडियो में काम शुरू किया और बंगाली गानों को हिंदी में डबिंग करके अपनी आवाज में ढालना शुरू कर दिया।

भूपेन हजारिका

विदेश में मिला प्यार और फिर शादी

कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान भूपेन हजारिका की मुलाकात प्रियम्वदा पटेल से हुई। दोनों के बीच धीरे-धीरे नजदीकियां बढ़ी और साल 1950 में दोनों ने अमेरिका में शादी कर ली। शादी के 2 साल बाद उनके घर एक बेटे का जन्म हुआ। इसके बाद साल 1953 में वह अपने परिवार को लेकर भारत लौट आए। भारत आने के बाद उन्होंने गुवाहाटी यूनिवर्सिटी में शिक्षक के तौर पर पढ़ाना शुरू किया, लेकिन अपनी कलात्मक स्वतंत्रता और संगीत के प्रति जुनून के कारण उन्होंने जल्द ही अपनी नौकरी से रिजाइन कर दिया।

नौकरी छोड़ने के बाद जिंदगी में आया नया मोड

नौकरी छोड़ देने के बाद भूपेन हजारिका के जीवन में आर्थिक मुसीबतें पैदा हो गईं। पैसों की लगातार बनी तंगी के कारण उनका पारिवारिक जीवन प्रभावित हुआ और आखिरकार उनकी पत्नी उन्हें छोड़कर चली गईं। परिवार टूटने के बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान फिल्मों के संगीत पर केंद्रित कर दिया।

उन्होंने डिंपल कपाडिया स्टारर फिलम 'रुदाली', 'साज', 'दरमियां', 'दमन' और 'गजगामिनी' जैसी सुपरहिट फिल्मों के लिए सदाबहार गीत तैयार किए। अपने पूरे जीवन में 1 हजार से ज्यादा गाने गाने वाले और 15 किताबें लिखने वाले यह महान कलाकार साल 2011 में दुनिया को अलविदा कह गए।

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