Varun Grover Support AR Rahman: ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान हाल ही में अपने एक बयान को लेकर सुर्खियों में आ गए। विक्की कौशल की फिल्म ‘छावा’ पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने इसे एक विभाजनकारी फिल्म बताया था। साथ ही उन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ते सांप्रदायिक भेदभाव की ओर भी इशारा किया। रहमान के इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं और उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
विवाद बढ़ने के बाद एआर रहमान को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने एक वीडियो जारी कर माफी मांगते हुए कहा कि अगर उनके शब्दों से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो उन्हें इसका खेद है। रहमान ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कभी किसी समुदाय, व्यक्ति या विचारधारा को नुकसान पहुंचाना नहीं रहा।
इस पूरे मामले के बीच अब गीतकार और लेखक वरुण ग्रोवर एआर रहमान के समर्थन में सामने आए हैं। वरुण ग्रोवर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आमिर खान की फिल्म ‘लगान’ का मशहूर गीत ‘ओ पालनहारे’ शेयर किया। इसके साथ उन्होंने एक लंबा पोस्ट लिखते हुए कहा कि पिछले तीन दशकों के सबसे महान जीवित संगीतकार को उनके निजी अनुभव पर आधारित एक राय को बेहद शालीन और विनम्र तरीके से व्यक्त करने के बावजूद निशाना बनाया गया। वरुण ग्रोवर ने लिखा कि रहमान को न सिर्फ आलोचना, बल्कि गाली-गलौज और हमलों का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि अगले ही दिन उन्हें एक जहरीली भीड़ को शांत करने के लिए माफी या स्पष्टीकरण जारी करने पर मजबूर होना पड़ा। वरुण ग्रोवर के मुताबिक, अगर समाज में बढ़ती फूट की ओर इशारों के लिए किसी और सबूत की जरूरत थी, तो यह घटना अपने आप में काफी है।
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वहीं, एआर रहमान ने अपनी माफी में कहा था कि संगीत हमेशा से उनके लिए भारत की संस्कृति से जुड़ने, उसका सम्मान करने और उसे सेलिब्रेट करने का माध्यम रहा है। उन्होंने कहा कि भारत उनके लिए सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि उनकी प्रेरणा, गुरु और घर है। रहमान ने यह भी स्वीकार किया कि कई बार किसी के इरादों को गलत समझ लिया जाता है, लेकिन उनका मकसद हमेशा संगीत के जरिए सकारात्मकता फैलाने का रहा है।
दरअसल, एआर रहमान ने BBC हिंदी को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें पहले कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ, लेकिन पिछले करीब आठ वर्षों में उन्हें इंडस्ट्री का माहौल बदला हुआ लगा। उन्होंने संकेत दिए थे कि सत्ता में बदलाव आया है और अब फैसले ऐसे लोगों के हाथ में हैं जो रचनात्मक नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि यह एक सांप्रदायिक मुद्दा हो सकता है, हालांकि उनके सामने यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।