Anupriya Nagar at Bageshwar Dham: बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता हासिल करने वाली फिल्में न केवल कमाई का नया रिकॉर्ड बनाया हैं, बल्कि उनके निर्माताओं से दर्शकों की उम्मीदें भी काफी बढ़ा देती हैं। नीम करौली बाबा के जीवन से प्रेरित होकर बनी आध्यात्मिक फिल्म के रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन के बाद अब इसके निर्माता के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इसी बीच फिल्म की युवा प्रोड्यूसर के धार्मिक स्थल पहुंचने से एक नए प्रोजेक्ट को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
महज 2 करोड़ रुपये के मामूली बजट में बनी फिल्म 'हनुमान अंश' की सफलता ने पूरे फिल्म इंडस्ट्री को चौंका कर रख दिया है। रिलीज के 40 से ज्यादा दिन बीत जाने के बाद भी यह फिल्म सिनेमाघरों में मजबूती से टिकी हुई है। बड़ी स्टार कास्ट और भारी-भरकम बजट वाली फिल्मों की मौजूदगी के बावजूद इस फिल्म ने दुनिया भर में 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन कर लिया है, जबकि भारतीय बॉक्स ऑफिस पर इसका कलेक्शन 248 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है।
फिल्म हनुमान अंश की अभूतपूर्व कामयाबी के बाद इसकी 21 साल की निर्माता अनुप्रिया नागर मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित प्रसिद्ध बागेश्वर धाम पहुंचीं। यह दूसरा मौका था जब उन्होंने इस पावन स्थल का दौरा किया। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से खास मुलाकात की। इतने कम समय और छोटी सी उम्र में ऐसी ऐतिहासिक फिल्म बनाने वाली अनुप्रिया की प्रतिभा की हर तरफ सराहना हो रही है।
हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि बागेश्वर धाम पर फिल्म बनाने की अटकलों पर अनुप्रिया नागर ने मीडिया से बातचीत में स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि वे खुद से फिल्में नहीं बनातीं, बल्कि नीम करौली बाबा की प्रेरणा से ही वे इस क्षेत्र में आईं। उन्होंने साफ किया कि अगर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और संन्यासी बाबा का मार्गदर्शन मिलेगा, तो वे इसे अपना बड़ा सौभाग्य मानकर ऐसी महान कहानियों को दुनिया के सामने जरूर लेकर आएंगी।
इंटरव्यू के दौरान फिल्म निर्माण से जुड़ी चुनौतियों का जिक्र करते हुए को-प्रोड्यूसर रागिनी सोना ने एक अहम वाकया शेयर किया। उन्होंने बताया कि तीसरे हफ्ते में जब बड़े बजट की फिल्म 'टॉक्सिक' सिनेमाघरों में आई, तो फिल्म 'हनुमान अंश' के पास महज 25 से 30 थिएटर ही बचे थे। हालांकि डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी और उनकी टीम ने हार नहीं मानी और डिस्ट्रीब्यूटर्स से दोबारा बात करके फिल्म को सिनेमाघरों में बनाए रखने में सफलता हासिल की।