Anubhav Sinha Mahatma Gandhi Movie: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में महात्मा गांधी के योगदान को लेकर अनगिनत गाथाएं लिखी और पढ़ी गई हैं। हालांकि उनके जीवन से जुड़े कई ऐसे किस्से भी हैं जो आज भी आम लोगों की नजरों से ओझल हैं।
इन्हीं अनसुने और गहरे पन्नों को बड़े पर्दे पर उकेरने का बीड़ा बॉलीवुड के 2 बड़े डायरेक्टर अनुभव सिन्हा और सुधीर मिश्रा ने उठाया है। उन्होंने एक बेहद महत्वाकांक्षी सिनेमाई प्रोजेक्ट के लिए हाथ मिलाया है, जिसमें बापू के जीवन के एक ऐसे किस्सों को दिखाया जाएगा।
यह कहानी आजादी के उस दौर की है जब देश में सत्ता के नए समीकरण बन रहे थे। उसी समय महात्मा गांधी दिल्ली में सत्ता के मुख्य केंद्र से दूर एक अज्ञात रास्ते पर निकल गए थे। वह चुपचाप आत्म-मंथन और एकांत की तलाश में चले गए थे। फिल्म में गांधी जी की जिंदगी के उन्हीं रहस्यमयी 21 दिनों के अंदर घटी घटनाओं और इंसानी भावनाओं के ताने-बाने को बहुत बारीकी से दर्शाया जाएगा।
मेकर्स ने इस ऐतिहासिक और संवेदनशील रोल के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता एक्टर मनोज बाजपेयी पर भरोसा जताया है, जो बापू की भूमिका में नजर आने वाले हैं। उनके साथ सौरभ शुक्ला भी एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावी रोल में दिखाई देंगे।
इस फिल्म को लेकर सिनेप्रेमियों का उत्साह तब और बढ़ गया जब भारतीय सिनेमा की सर्वकालिक महान एक्ट्रेस वहीदा रहमान के इसमें शामिल होने की पुष्टि हुई। लंबे अरसे के बाद उनकी बड़े पर्दे पर वापसी दर्शकों को एक अविस्मरणीय सिनेमाई अनुभव देने का वादा करती है।
बनारस मीडिया वर्क्स के बैनर तले नरेंद्र हीरावत के साथ मिलकर इस फिल्म का निर्माण कर रहे अनुभव सिन्हा का मानना है कि ऐसी ऐतिहासिक गाथाओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हर सिनेमामेकर की नैतिक जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि आने वाले 100 सालों तक हर साल महात्मा गांधी पर एक-दो फिल्में बनती रहनी चाहिए। जिन स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान पर आज के गौरवान्वित भारत की नींव टिकी है, उनकी कहानियां आने वाली पीढ़ियों को सुनाना बहुत जरूरी है।
सुधीर मिश्रा के डायरेक्शन में बन रही इस फिल्म को एनएच स्टूडियोज द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है। अनुभव सिन्हा और सुधीर मिश्रा जैसे 2 विचारशील निर्देशकों की जुगलबंदी ने इस प्रोजेक्ट को साल की सबसे प्रतीक्षित फिल्मों में शामिल कर दिया है। बड़े पर्दे पर एक साथ एक्टिंग के पुरधों का जमावड़ा और पीछे बेहतरीन कहानीकारों की सोच का संगम एक ऐसा ताना-बाना बुन रहा है, जो दर्शकों को निजी तौर पर झकझोरने के साथ-साथ एक नई सोच देने का काम करेगा।