West Bengal Assembly Elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान हिंसा और झड़प की घटनाएं सामने आ रही हैं। भवानीपुर विधानसभा सीट पर जहां पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सामना भाजपा के दिग्गज नेता सुवेंदु अधिकारी से हो रहा है, वहीं इस सीट से हिंसा की खबरें भी आ रही हैं। इन घटनाओं ने मतदान प्रक्रिया को प्रभावित किया है और चुनाव आयोग की ओर से हस्तक्षेप की मांग उठाई जा रही है।
भाजपा ने आरोप लगाया है कि कुछ मतदान बूथों पर ईवीएम पर भाजपा के चुनाव चिन्ह "कमल" को टेप से ढक दिया गया। भाजपा ने इसे एक बड़ी धोखाधड़ी करार देते हुए चुनाव आयोग से अविलंब हस्तक्षेप की मांग की है। फाल्टा विधानसभा क्षेत्र से यह आरोप सामने आया, जहां टीएमसी नेता जहांगीर खान का प्रभाव है। भाजपा का कहना है कि यह एक सुनियोजित साजिश है, जिसे वोटिंग के दौरान लोगों की पसंद को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है।
भवानीपुर में तनाव उस समय बढ़ गया जब भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने घेर लिया। मौके पर भारी हंगामा और नारेबाजी देखी गई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सुवेंदु अधिकारी ने इस स्थिति में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग की और कहा, "तुरंत CRPF भेज दीजिए… हम यहां हैं, आप CRPF भेज दीजिए… देखिए ये लोग किस तरह से कर रहे हैं।" उनके इस बयान के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भवानीपुर की घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यह घटना पश्चिम बंगाल की सच्चाई को उजागर करती है। उनके मुताबिक, सुवेंदु अधिकारी के मौके पर पहुंचते ही कथित फर्जी वोटरों को कैमरे में पकड़ा गया, और स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। मालवीय ने यह आरोप भी लगाया कि ममता बनर्जी लंबे समय से अवैध वोटरों का सहारा लेकर अपनी सत्ता बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन इस बार जनता जागरूक है और इसका विरोध कर रही है।
इसके अलावा, साउथ 24 परगना की बसंती विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार विकास सरदार की कार पर भी हमला किया गया। इस हमले में भाजपा नेता की कार के शीशे चकनाचूर हो गए। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया, और पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई। हालांकि, मतदान प्रक्रिया जारी है।
इन घटनाओं के बाद सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ा दी गई है और इलाके में स्थिति पर नजर रखी जा रही है। चुनाव आयोग ने भी इन घटनाओं का संज्ञान लिया है, और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन सक्रिय हो गया है। फिलहाल, प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, और यह देखना होगा कि चुनाव आयोग इन घटनाओं पर कैसे प्रतिक्रिया देता है।
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इन घटनाओं के बाद, पश्चिम बंगाल चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं। भाजपा और टीएमसी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, और चुनाव आयोग की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।