ममता बनर्जी, फोटो- सोशल मीडिया 
विधानसभा चुनाव 2026

बंगाल चुनाव में भारी बवाल: क्या ममता बनर्जी की 'रसोई वाली चेतावनी' पड़ जाएगी भारी? चुनाव आयोग सख्त

West Bengal Election 2026: बंगाल चुनाव से पहले ममता बनर्जी के विवादित भाषण और चुनावी हिंसा पर चुनाव आयोग सख्त हो गया है। आयोग ने सीआरपीएफ पर टिप्पणी के लिए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

प्रतीक पाण्डेय

Conflict on Mamata Banerjee Speech: पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, वैसे-वैसे वहां का चुनावी पारा भी उबाल मार रहा है। 2026 के इस विधानसभा चुनाव में हर कदम पर सस्पेंस और तनाव की स्थिति बनी हुई है। लोकतंत्र के इस महापर्व में जब नेता जनता के बीच जाते हैं, तो शब्दों की मर्यादा अक्सर दांव पर लग जाती है।

ताजा मामला खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़ा है, जिनके एक भाषण ने अब चुनाव आयोग (ECI) की भौहें तान दी हैं। बंगाल की राजनीति में 'दीदी' का आक्रामक अंदाज कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार मामला सुरक्षा बलों और घरेलू उपकरणों के उपयोग से जुड़ गया है, जिसने एक नई कानूनी और संवैधानिक बहस को जन्म दे दिया है।

नक्सलबाड़ी के भाषण ने बढ़ाई 'दीदी' की मुश्किलें

विवाद की शुरुआत दार्जिलिंग के नक्सलबाड़ी स्थित नंदप्रसाद गर्ल्स हाई स्कूल के मैदान से हुई। 25 मार्च 2026 को एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कुछ ऐसा कह दिया जो अब उनके लिए गले की फांस बन सकता है। चुनाव आयोग को मिले वीडियो के मुताबिक, मुख्यमंत्री कथित तौर पर सीआरपीएफ (CRPF) के जवानों को धमकी देती नजर आ रही हैं। उन्होंने वहां मौजूद महिलाओं और लड़कियों से कहा कि वे मतदान केंद्रों पर डटी रहें और यदि जरूरत पड़े, तो किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अपनी रसोई के बर्तनों और उपकरणों का इस्तेमाल करें। अब आयोग ने इसे सुरक्षा बलों को डराने और महिलाओं को हिंसा के लिए उकसाने के तौर पर देखा है। इस संबंध में पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है ताकि भाषण की गंभीरता की जांच की जा सके।

बासंती हिंसा पर गिरी गाज

आयोग केवल भाषणों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह चुनावी हिंसा पर भी सख्त रुख अपना रहा है। दक्षिण 24 परगना जिले के बासंती में हुई हिंसक घटना के बाद आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। वहां के थाना प्रभारी, इंस्पेक्टर अविजित पॉल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। दरअसल, 26 मार्च को भाजपा उम्मीदवार विकास सरदार के प्रचार के दौरान भारी हिंसा भड़की थी, जिसमें कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए। आयोग का मानना है कि इंस्पेक्टर पॉल के पास हिंसा की पूर्व सूचना थी और केंद्रीय सुरक्षा बल उपलब्ध होने के बावजूद उन्होंने उनकी मदद नहीं ली। यह कर्तव्य में घोर लापरवाही का मामला माना गया है, क्योंकि सुरक्षा बलों की मौजूदगी में भी हिंसा को नहीं रोका जा सका।

'यूपी स्टाइल एनकाउंटर' और 'जिहादी' आरोपों से दहकी बंगाल की सियासत

बासंती की इस हिंसा ने राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग को और तेज कर दिया है। भाजपा सांसद बिप्लब कुमार देब ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर "जिहादियों" और टीएमसी के गुंडों को जिम्मेदार ठहराया है।, उन्होंने दावा किया कि यह एक सुनियोजित हमला था जिसमें सुरक्षा बलों को भी नहीं बख्शा गया। दूसरी तरफ, भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने कानून-व्यवस्था को लेकर एक ऐसा बयान दिया जिसने राजनीति में भूचाल ला दिया है।

उन्होंने खड़गपुर में कहा कि अगर बंगाल में भाजपा सरकार बनती है, तो अपराधियों के खिलाफ 'यूपी स्टाइल में एनकाउंटर' किए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सत्ताधारी दल के दबाव में काम कर रहा है।

4 मई को साफ हो जाएगी बंगाल की तस्वीर

पश्चिम बंगाल में मतदान दो चरणों में, 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होना है, जबकि नतीजों का एलान 4 मई को किया जाएगा। जैसे-जैसे मतदान की तारीखें करीब आ रही हैं, चुनावी रैलियों में भाषा का स्तर और जमीनी स्तर पर हिंसा की घटनाएं एक बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।

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