सुप्रीम कोर्ट, (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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सुप्रीम कोर्ट से ममता बनर्जी को बड़ा झटका, कपिल सिब्बल ने इन 4 प्वाइंट्स में रखी दलील; SC ने क्या कहा?

Supreme Court TMC Hearing: आज सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की याचिका पर सुनवाई की। पार्टी का पक्ष सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने 4 बिंदुओं में रखा। लेकिन अंततः कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। जानें क्यों-

प्रतीक पाण्डेय

Supreme Court Dismissed TMC Petition: टीएमसी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए याचिका दायर की थी। ये याचिका चुनाव में केंद्र के कर्मियों की नियुक्ति को लेकर थी। ममता बनर्जी के वकील कपिल सिब्बल ने इस मामले में अपना पक्ष रखा, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।

कपिल सिब्बल ने 4 बिंदुओं में अपनी बात रखी। सिब्बल का कहना था कि ‘चुनाव आयोग एकतरफा फैसले नहीं ले सकता।" उन्होंने कहा, "हमें आशंका है कि ACEO के आदेश से काउंटिंग में गड़बड़ी होगी।’ इस पर अदालत ने कहा कहा, जानिए-

पहले समझिए पूरा मामला क्या है

दरअसल हाल ही में कलकत्ता कोर्ट में ममता बनर्जी की पार्टी ने वोट काउंटिंग में केवल केंद्रीय और पीएसयू कर्मचारियों को सुपरवाइजर बनाने के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच में जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सुना। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एडिशनल सीईओ के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है।

कपिल सिबल ने कौन से चार मुद्दे उठाए

कपिल सिबल ने कोर्ट के सामने ये चार मुद्दे उठाए।

  • केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति संबंधी सर्कुलर डीईओ को 13 अप्रैल को जारी किया गया था, लेकिन इसकी जानकारी 29 अप्रैल को मिली।
  • ईसीआई का कहना है कि उन्हें सभी बूथों पर अनियमितता की आशंका है।
  • ईसीआई के पास पहले से ही सभी वोटिंग सेंटर्स पर केंद्र सरकार का एक नामित व्यक्ति (माइक्रो ऑब्जर्वर के रूप में) मौजूद है।
  • ईसीआई ने राज्य सरकार के नामित व्यक्ति की नियुक्ति नहीं की, जबकि सर्कुलर में इसका प्रावधान किया गया है।

इसके साथ ही टीएमसी की ओर से कहा गया कि काउंटिंग सुपरवाइजर के तौर पर स्टेट कर्मियों की नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही? संविधान के अनुच्छेद 324 की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और आयोग मनमानी कर रहा है। पार्टी का दावा है कि चुनाव आयोग राज्य कर्मचारियों की नीयत पर सवाल खड़े कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने इस बात पर कहा कि ऐसे आरोप नहीं लगाए जा सकते हैं। कर्मचारी राज्य के हों या केंद्र के, सभी आयोगों के तहत काम कर रहे हैं। ऐसा नहीं हैं कि वहां पर सिर्फ काउंटिंग के सुपरवाइजर होंगे इसके साथ ही वहां के प्रत्याशियों के भी प्रतिनिधियों के साथ-साथ अन्य भी अधिकारी होंगे। ऐसे में किसी की तरह की आशंका का कोई आधार नहीं बनता। इसके साथ ही कोर्ट ने एडिशनल सीईओ के फैसले में दखलंदाजी से इनकार कर दिया।

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