बिहार विधानसभा चुनाव में गणित बिगाड़ने के लिए ओवैसी तैयार (फोटो- सोशल मीडिया) 
विधानसभा चुनाव 2026

ओवैसी की रणनीति से हिलेगा RJD का साम्राज्य, बदलेंगे सत्ता के समीकरण? सीमांचल, कोसी व मगध पर नजर

Bihar Assembly Election में ओवैसी ने गेमचेंजर बनने के लिए कमर कस ली है। उन्होंने मुस्लिम वोटर को टार्गेट करते हुए राज्य के मुस्लिम बहुल्य सीटों पर प्लानिंग के साथ मैदान में उतरने को परी तरह तैयार है।

सौरभ शर्मा

AIMIM Enter in Bihar politics: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सियासी बिसात बिछने लगी है और इस बार असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। ओवैसी ने 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर NDA और INDIA ब्लॉक, दोनों गठबंधनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उनकी यह रणनीति मुस्लिम वोटरों को एक नया विकल्प दे सकती है, जिससे वे इस चुनाव में 'किंगमेकर' की भूमिका में आ सकते हैं। अब सवाल यह है कि क्या ओवैसी का यह कदम बिहार में सत्ता का पूरा खेल बदल देगा?

दरअसल, AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखकर INDIA ब्लॉक के साथ गठबंधन की इच्छा जताई थी, ताकि मुस्लिम बहुल सीटों पर वोटों का बिखराव न हो और इसका सीधा फायदा RJD को मिले। लेकिन RJD की तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद अब ओवैसी ने अकेले ही चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है। उनका यह दांव खासकर RJD के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकता है, क्योंकि मुस्लिम वोट बैंक परंपरागत रूप से RJD का मजबूत आधार माना जाता है।

सीमांचल पर नजर, RJD का बिगड़ेगा खेल?

AIMIM की नजर बिहार के सीमांचल, मगध और कोसी जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों पर है। सीमांचल की 24 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम आबादी लगभग 47 प्रतिशत है, जो नतीजों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। 2020 के चुनाव में भी ओवैसी ने सीमांचल की 14 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 5 पर जीत हासिल कर उन्होंने RJD का सरकार बनाने का सपना तोड़ दिया था। इस बार भी उनका फोकस किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया जैसे जिलों पर है, जहां मुस्लिम आबादी क्रमशः 70%, 42% और 38% है, जो किसी भी दल का समीकरण बनाने या बिगाड़ने के लिए काफी है।

क्या दोहराया जाएगा 2020 का इतिहास?

असदुद्दीन ओवैसी ने 2015 में बिहार के चुनावी रण में कदम रखा था, लेकिन तब उन्हें कोई सफलता नहीं मिली थी। हालांकि, 2020 में 20 सीटों पर लड़कर 5 सीटें जीतना एक बड़ी उपलब्धि थी। भले ही 2022 में उनके 4 विधायक RJD में शामिल हो गए, लेकिन इस बार 100 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का ऐलान यह दिखाता है कि ओवैसी दोनों गठबंधनों को कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यदि AIMIM मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब रही, तो बिहार में सरकार बनाने के लिए दोनों बड़े गठबंधनों को ओवैसी के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है, जिससे वे सच में किंगमेकर बन सकते हैं।

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